ब्रिटेन-नीदरलैंड-फिनलैंड और पोलैंड ने साझा डिफेंस प्लान पर तेजी से बढ़ने का किया दावा
वारसॉ, 06 जुलाई (हि.स.)। ब्रिटेन, नीदरलैंड, फिनलैंड और पोलैंड ने सोमवार को कहा कि वे नई बहुपक्षीय रक्षा योजना पर महत्वपूर्ण प्रगति कर रहे हैं और इसका लक्ष्य वर्ष 2027 तक इस व्यवस्था को औपचारिक रूप से स्थापित करना है।
चारों देशों ने संयुक्त बयान में कहा कि रक्षा वित्तपोषण के इस नए मॉडल के तकनीकी पहलुओं को विकसित करने में उन्हें नाटो के कई अन्य सहयोगी देशों का भी समर्थन मिला है।
इस सप्ताह तुर्किये की राजधानी अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में रक्षा खर्च और वित्तपोषण प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगा। एमडीएम उन कई पहलों में से एक है, जिनका उद्देश्य निजी निवेश को रक्षा क्षेत्र में आकर्षित कर सदस्य देशों की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना है।
संयुक्त बयान के अनुसार, चारों देश इस परियोजना से जुड़ने वाले देशों के समूह का विस्तार करेंगे और शरद ऋतु से उन देशों के साथ अगले चरण की प्रक्रिया शुरू करेंगे, जिन्होंने इस पहल में शामिल होने की इच्छा जताई है।
रक्षा वित्तपोषण के क्षेत्र में डिफेंस, सिक्योरिटी एंड रेजिलिएंस बैंक (डीएसआरबी) भी एक प्रमुख पहल के रूप में उभर रही है। कनाडा नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान डीएसआरबी के लगभग 10 संस्थापक सदस्य देशों की घोषणा करने की तैयारी में है।
हालांकि, ब्रिटेन ने डीएसआरबी में शामिल होने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि वह अपनी प्राथमिकता एमडीएम परियोजना को ही देगा। वहीं, पोलैंड के वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में यह स्पष्ट नहीं किया कि वह डीएसआरबी में शामिल होने के लिए बातचीत कर रहा है या नहीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय