ताइवान का आरोप- चीन के दबाव में केन्या ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से किया बाहर

 

ताइपे, 16 जून (हि.स.)। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने चीन पर आरोप लगाया है कि उसने केन्या पर दबाव डालकर ताइवानी प्रतिनिधियों को 11वें ‘आवर ओशन कॉन्फ्रेंस’ में भाग लेने से रोका। मंत्रालय ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समुद्री स्थिरता से जुड़े प्रयासों के लिए नुकसानदायक बताया है।

ताइवान के अनुसार, उसके शिक्षाविदों का एक दल केन्या सरकार के निमंत्रण पर सम्मेलन से पहले आयोजित शैक्षणिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए मोंबासा पहुंचा था। हालांकि सम्मेलन स्थल पर उन्हें प्रवेश-पत्र जारी नहीं किए गए और ताइवानी पासपोर्ट को मान्यता न देने का हवाला दिया गया।

विदेश मंत्रालय का दावा है कि प्रतिनिधियों के पासपोर्ट और मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए तथा उन्हें लगभग 20 घंटे तक रोके रखा गया। बाद में उन्हें देश छोड़ने के लिए विमान में बैठाया गया।

ताइवान की सरकार ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए सम्मेलन में अपने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की प्रस्तावित भागीदारी भी रद्द कर दी। मंत्रालय का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि समुद्री संरक्षण और सतत विकास जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी राजनीतिक दबाव हावी हो रहा है।

ताइवान ने कहा कि वह वर्ष 2015 से ‘आवर ओशन कॉन्फ्रेंस’ में भाग लेता रहा है, लेकिन इस बार केन्या ने कथित तौर पर चीन के दबाव के चलते उसे मंच से दूर रखा। मंत्रालय ने इसे सम्मेलन की समावेशिता और सहयोग की भावना के विपरीत बताया।

ताइवान ने चीन पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भागीदारी सीमित करने का आरोप लगाते हुए समान विचारधारा वाले देशों से इस मुद्दे पर ध्यान देने और वैश्विक सहयोग को प्रभावित करने वाली ऐसी गतिविधियों का विरोध करने की अपील की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय