स्वामी अवधेशानन्द गिरी ने नेपाल में किए जीवित देवी कुमारी के दर्शन-पूजन

 




काठमांडू, 21 जून (हि.स.)। विश्व के सबसे प्राचीन जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरी ने नेपाल प्रवास के दौरान नेपाल की जीवित देवी कुमारी के दर्शन एवं विधिवत पूजन किया है। जीवित देवी कुमारी का दर्शन और पूजन करने वाले वे पहले प्रमुख धर्माचार्य बन गए हैं।

कुमारी के दर्शन करने के बाद अत्यंत भाव विभोर हुए स्वामी अवधेशानन्द गिरी जी ने पत्रकारों से संक्षिप्त वार्ता करते हुए कहा कि जगत जननी माँ जगदम्बा की साक्षात प्रतिमूर्ति रही नेपाल की जीवित देवी कुमारी के दर्शन और पूजन करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने विश्व के समस्त हिन्दू समाज से अपील की है कि वे जब भी आराध्य देव पशुपतिनाथ की इस देवभूमि पर आए तो कुमारी देवी का दर्शन का सौभाग्य अवश्य प्राप्त करें। स्वामी अवधेशानन्द जी ने यह भी कहा कि इस तरह की धार्मिक, आध्यात्मिक, पौराणिक मान्यता वाली जीवित देवी के दर्शन से न सिर्फ नेपाल और भारत के बीच के हमारे संबंधों को प्रगाढ़ बनाएगी अपितु समस्त विश्व का कल्याण इससे हो सकता है।

इस विशेष अवसर को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नेपाल की प्राचीन परंपरा में कुमारी को जीवित देवी के रूप में पूजा जाता है, जिनका विशेष महत्व खासकर नेवार समुदाय में है। नेवार समुदाय की मान्यता के अनुसार कुमारी देवी शक्ति, संरक्षण और शुभता का प्रतीक हैं। सदियों पुरानी यह परंपरा नेपाल की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

स्वामी अवधेशानन्द गिरी के इस कदम को नेपाल की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने वाला माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इससे तीर्थयात्रियों के लिए एक नया आध्यात्मिक द्वार खुलेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, अब पशुपति मंदिर के दर्शन के लिए नेपाल आने वाले दुनियां भर के श्रद्धालु जीवित देवी कुमारी के दर्शन को भी अपनी तीर्थयात्रा का हिस्सा बना सकते हैं। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नेपाल की अद्वितीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं की रुचि भी बढ़ेगी।

स्वामी अवधेशानन्द गिरी का वसंतपुर में स्वागत करने वाले हली नेवा गुठी का मानना है कि यह पहल नेपाल के आध्यात्मिक पर्यटन को नया आयाम दे सकती है, जहां श्रद्धालु एक ही यात्रा में पशुपतिनाथ और जीवित देवी कुमारी—दोनों के दर्शन कर सकेंगे। इससे नेपाल की धार्मिक पहचान और अधिक सशक्त होने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास