पोप लियो का बयान— ट्रम्प से बहस जरूरी नहीं, शांति संदेश जारी रहेगा
वेटिकन सिटी, 18 अप्रैल (हि.स.)। कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप लियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ चल रहे बयानबाजी के बीच स्पष्ट किया है कि ईरान युद्ध जैसे मुद्दों पर उनसे बहस करना उनके लिए आवश्यक नहीं है। शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में पोप लियो ने कहा कि उनका ध्यान किसी व्यक्तिगत विवाद पर नहीं, बल्कि शांति और मानवीय मूल्यों के प्रसार पर केंद्रित है।
पोप ने कहा कि उनका संदेश किसी एक व्यक्ति या देश के लिए नहीं है, बल्कि यह व्यापक स्तर पर शांति, सह-अस्तित्व और सुसमाचार के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हाल के दिनों में उनके और ट्रंप के बीच जो बयानबाजी हुई, वह परिस्थितियों का परिणाम थी, न कि किसी व्यक्तिगत टकराव की इच्छा।
उन्होंने कहा, “एक तरह की कहानी प्रस्तुत की गई है, जो पूरी तरह सही नहीं है। हालात तब बने जब मेरी यात्रा के पहले दिन अमेरिका के राष्ट्रपति ने मेरे बारे में कुछ टिप्पणियां कीं।” हालांकि, पोप ने इस पूरे घटनाक्रम को ज्यादा तूल देने से इनकार करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य संवाद को टकराव में बदलना नहीं है।
पोप लियो ने दोहराया कि वे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखते रहेंगे, खासकर उन मामलों में जहां मानवीय संकट और शांति की आवश्यकता हो। उन्होंने ईरान से जुड़े तनाव और मध्य पूर्व की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और समझ के जरिए ही संभव है।
पोप ने आखिर में कहा कि वे आगे भी शांति, मानवता और संवाद के पक्ष में अपनी आवाज उठाते रहेंगे, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों।
माना जा रहा है कि पोप का यह बयान वैश्विक स्तर पर शांति और कूटनीति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश है। ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ रहा है, धार्मिक और नैतिक नेतृत्व की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय