नाजी सहयोगियों काे सम्मान देने पर पोलैंड, इजराइल और रूस ने की यूक्रेन की आलाेचना

 




वारसा, 02 जुलाई (हि.स.)। पोलैंड ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की की उस पहल की आलोचना की है, जिसके तहत द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विवादित यूक्रेनी राष्ट्रवादी नेताओं के सम्मान में एक राष्ट्रीय स्मारक स्थापित करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। इसको लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। वहीं, इज़राइल और रूस ने आलोचना करते हुए यूक्रेन में नियो-नाज़ी विचारधारा के बढ़ते प्रभाव को इसका कारण माना है।

पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवरोत्स्की के कार्यालय ने आरोप लगाया कि यूक्रेन की यह पहल दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक विवाद को और गहरा करेगी। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता राफाल लेस्केविच ने कहा कि यह कदम यूक्रेनी अधिकारियों की तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयों की अगली कड़ी है।

यूक्रेन की संसद ने बुधवार को सर्वसम्मति से 'बेहतरीन यूक्रेनियों का स्मारक' स्थापित करने संबंधी विधेयक को मंजूरी दी। इससे पहले राष्ट्रपति जेलेंस्की ने विवादित यूक्रेनी राष्ट्रवादी नेता आंद्रे मेलनिक और उनकी पत्नी सोफिया फेडक-मेलनिक के अवशेषों को राजकीय सम्मान के साथ दोबारा दफनाने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

आंद्रे मेलनिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ यूक्रेनियन नेशनलिस्ट्स (ओयूएन) के प्रमुख नेताओं में से एक थे। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनके नाज़ी जर्मनी के साथ संबंध रहे थे, हालांकि बाद में उनके और नाज़ी नेतृत्व के बीच मतभेद भी सामने आए थे।

पोलैंड के रक्षा मंत्री व्लादिस्लाव कोसिनियाक-कामिश ने कहा कि जब तक यूक्रेन ओयूएन नेता स्टेपन बांडेरा जैसे विवादित व्यक्तियों का महिमामंडन करता रहेगा, तब तक उसके यूरोपीय संघ की सदस्यता हासिल करने में कठिनाइयां बनी रहेंगी।

वहीं, इज़राइल के विदेश मंत्रालय ने भी आंद्रे मेलनिक को राजकीय सम्मान दिए जाने पर आपत्ति जताई है। दूसरी ओर, रूस ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे यूक्रेन पर नियो-नाज़ी विचारधारा का प्रभाव बढ़ने का आरोप लगाया है।

यूक्रेन की ओर से इन आलोचनाओं पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यूक्रेन में कुछ राष्ट्रवादी समूह ओयूएन और यूपीए को सोवियत शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक मानते हैं, जबकि पोलैंड, इज़राइल और कई इतिहासकार इन संगठनों की भूमिका को लेकर गंभीर आपत्तियां जताते रहे हैं।

गाैरतलब है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूक्रेनी इंसर्जेंट आर्मी (यूपीए) जो ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ यूक्रेनी नेशनलिस्ट्स (ओयूएन) की सशस्त्र शाखा थी जिसके सदस्यों ने अल्पसंख्यकों की बड़े पैमाने पर हत्याएं कीं, जो अब पश्चिमी यूक्रेन का हिस्सा है। यूपीए के उग्रवादियों ने कम से कम एक लाख पोलिश नागरिकों की हत्या की, जिसे 'वोल्हिनिया नरसंहार' के नाम से जाना जाता है।

नूर्नबर्ग ट्रायल के दस्तावेज़ों के अनुसार मेलनिक ने 1929 में ओयूएन की सह-स्थापना की और 1938 में इसके नेता बने। साथ ही, सोवियत संघ पर नियोजित हमले से पहले उन्होंने नाज़ी जर्मनी की सैन्य खुफिया सेवा 'एब्वेहर' के साथ संबंध भी बनाए। उन्होंने एडॉल्फ हिटलर से यूक्रेनी 'वाफ़ेन-एसएस' डिवीजन बनाने का अनुरोध किया था, लेकिन बाद में नाज़ी नेता के साथ उनके संबंध खराब हो गए और 1944 में उन्हें कैद कर दिया गया। द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद मेलनिक लक्ज़मबर्ग में बस गए।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी