पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये रक्षा करार में मिस्र भी हो सकता है शामिल

 


अंकारा, 8 अगस्त (हि.स./रिया नोवोस्ती)। तुर्किये ने आज संकेत दिया कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और उसके बीच हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय रक्षा समझाैते में मिस्र भी शामिल हाे सकता है।

तुर्किये के उपराष्ट्रपति जेवदेत यिलमाज़ ने शनिवार को सीएनएन तुर्क काे दिये दिए एक साक्षात्कार में कहा कि मिस्र संभावित रूप से तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते में शामिल हो सकता है।

यिलमाज़ ने कहा, भविष्य में निश्चित रूप से (विस्तार) संभव है। मिस्र एक काफी मजबूत देश है, और ऐसे प्रारूप के लिए उसकी भागीदारी महत्वपूर्ण हो सकती है।

तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने शुक्रवार को मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। तुर्किये अखबार के अनुसार, इस समझौते में खुफिया जानकारी साझा करने और क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय में सहयोग का प्रावधान है।

पश्चिम एशिया मामलाें के विशेषज्ञ यूसुफ एनर ने रिया नोवोस्ती से बातचीत में कहा कि तुर्किये, पाकिस्तान एवं सऊदी अरब की इस त्रयी की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं। तुर्किये के पास मजबूत रक्षा उद्योग और सैन्य क्षमता है, सऊदी अरब के पास वित्तीय और ऊर्जा संसाधन हैं और पाकिस्तान के पास बड़ी सशस्त्र सेनाएं और परमाणु क्षमता है।

उन्होंने कहा, यदि त्रिपक्षीय प्रारूप को संस्थागत रूप दिया जाता है, तो इसमें अन्य क्षेत्रीय देशों को शामिल करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में अनातोलिया से लेकर लाल सागर, फारस की खाड़ी और हिंद महासागर तक एक नया सुरक्षा चाप उभर सकता है।

एनर ने कहा कि समझौते में एक प्रावधान यह भी है कि तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला सभी प्रतिभागियों पर हमला माना जाएगा, जिससे यह समझौता पारंपरिक हथियार सहयोग से आगे बढ़कर पारस्परिक रक्षा गारंटी का स्वरूप ले लेता है।

उल्लेखनीय है कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटाे) में भी इसी प्रकार का प्रावधान सदस्य देशाें काे सुरक्षा की गारंटी प्रदान करता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया