अमेरिका का हथियारों का निर्यात युद्ध संबंधी निर्यात : उत्तर कोरिया

 


प्योंगयांग, 14 जून (हि.स.)। उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया को उन्नत एयर-टू-एयर मिसाइलें बेचने की अमेरिकी मंजूरी की कड़ी आलोचना करते हुए इसे युद्ध-संबंधी निर्यात करार दिया है। उसका कहना है कि अमेरिका का हथियारों का निर्यात असल में युद्ध संबंधी निर्यात है और अमेरिकी हथियारों को आयात करने का मतलब है तनाव और टकराव को बढ़ाना। उत्तर कोरिया ने चेतावनी दी है कि इस कदम से कोरियाई प्रायद्वीप और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

रूस के अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रूस टुडे (आरटी) ने उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से बताया कि, विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आरोप लगाया कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया सैन्य सहयोग को लगातार मजबूत कर क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा दे रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी हथियारों का निर्यात शांति के बजाय टकराव को बढ़ाता है और इससे क्षेत्र में सैन्य प्रतिस्पर्धा तेज होगी।

यह प्रतिक्रिया अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा दक्षिण कोरिया को लगभग 300 मिलियन डॉलर के रक्षा पैकेज की मंजूरी के बाद आई है। इस पैकेज में 70 एआईएम-120सी-8 एडवांस्ड मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें और उनसे संबंधित उपकरण शामिल हैं। हालांकि यह सौदा अभी अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा के अधीन है।

उत्तर कोरिया ने दावा किया कि हाल के महीनों में अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के लिए कई अन्य रक्षा सौदों को भी मंजूरी दी है, जिनमें नौसैनिक हेलीकॉप्टर, अटैक हेलीकॉप्टर और गाइडेड बम शामिल हैं। उत्तर कोरिया का आरोप है कि इन कदमों का उद्देश्य दक्षिण कोरिया को क्षेत्रीय सैन्य टकराव का केंद्र बनाना है। उसका कहना है कि अमेरिका द्वारा जापान, ताइवान और अन्य सहयोगी देशों को हथियारों की आपूर्ति एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही है। इसके जवाब में उसने अपनी आत्मरक्षा क्षमता और सैन्य ताकत को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि उनका सैन्य सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। अमेरिका दक्षिण कोरिया में करीब 30,000 सैनिक तैनात रखता है और दोनों देश नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं।

दूसरी ओर, उत्तर कोरिया अमेरिका की सैन्य मौजूदगी, संयुक्त अभ्यास और इलाके में सेना की तैनाती को दुश्मनी भरे कदम मानता है। उसका आरोप है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य सहयोग असल में युद्ध की तैयारी है।

उत्तर कोरिया लगातार नए हथियारों का परीक्षण और प्रदर्शन करता रहता है और अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने को वाशिंगटन और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के दबाव का जवाब बताता है। वह अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को विदेशी दखलंदाज़ी के खिलाफ़ ज़रूरी प्रतिरोधक उपाय बताता है और कहता है कि ये पूरी तरह से रक्षात्मक हैं, जिनका मकसद संप्रभुता की रक्षा करना और ताकत के ज़रिए शांति बनाए रखना है।

कोरियाई प्रायद्वीप में दशकों से जारी तनाव के बीच उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताता रहा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इन्हें क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी