भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती फिर खोलने की मांग को लेकर पोखरा में प्रदर्शन

 


काठमांडू, 12 अगस्त (हि.स.)। भारतीय सेना (गोरखा रेजीमेंट) में नेपाली युवाओं की भर्ती फिर से शुरू करने की मांग को लेकर बुधवार को पोखरा में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने नेपाली युवाओं के लिए भारतीय सेना में भर्ती प्रक्रिया तत्काल फिर से शुरू करने तथा पूर्व सैनिकों से संबंधित संघ-संस्थाओं के नवीकरण की प्रक्रिया सुचारु करने की मांग की।

भारतीय भूतपूर्व सैनिक गोर्खा ब्रिगेड नेपाल, पोखरा के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पूर्व भारतीय सैनिकों और भारतीय सेना में भर्ती होने के इच्छुक युवाओं ने हिस्सा लिया। पोखरा के विभिन्न क्षेत्रों से निकला प्रदर्शन जिला प्रशासन कार्यालय कास्की पहुंचा, जहां प्रदर्शन के बाद प्रमुख जिला अधिकारी कुमारसिंह गुरुङ के माध्यम से सरकार को दो सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। ब्रिगेड के अध्यक्ष कर्नल कृष्णबहादुर खत्री के हस्ताक्षर वाले ज्ञापन को प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और गृहमंत्री सुधन गुरुङ को संबोधित किया गया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 1814–1816 के नेपाल-अंग्रेज युद्ध और सुगौली संधि के बाद तत्कालीन ब्रिटिश इंडिया सरकार ने नेपाली गोरखाओं की सेना में भर्ती शुरू की थी। भारत के स्वतंत्र होने के बाद भी यह परंपरा जारी रही। इस तरह गोरखा सैनिकों की भर्ती का इतिहास करीब 211 वर्ष पुराना हो चुका है। भारत में 14 जून, 2022 से लागू की गई ‘अग्निपथ’ योजना के बाद नेपाल सरकार ने विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती रोक दी थी।

कर्नल कृष्णबहादुर के अनुसार अग्निपथ योजना के तहत 17.5 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को ‘अग्निवीर’ के रूप में भर्ती किया जाता है। चार वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद इनमें से 25 प्रतिशत युवाओं को स्थायी सेवा में रखने का प्रावधान है। ज्ञापन के मुताबिक शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को करीब 18 लाख 71 हजार रुपये की एकमुश्त राशि देकर सेवा से मुक्त किया जाएगा। इसके अलावा उन्हें अर्धसैनिक बलों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार के लिए प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान है।

कर्नल खत्री ने कहा कि चार वर्ष की अवधि में एक युवा करीब 45 से 50 लाख रुपये तक कमाने का अवसर प्राप्त कर सकता है। यह अवसर बंद होने के कारण लाखों नेपाली युवा रोजगार के अवसर से वंचित हो रहे हैं और उन्हें खाड़ी देशों में करीब 50 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया लंबे समय तक बंद रहने से नेपाली युवाओं के सामने रोजगार का एक महत्वपूर्ण अवसर खत्म हो रहा है।

पूर्व सैनिकों ने यह भी चिंता जताई कि भर्ती रुकने से नेपाल में आने वाला पूर्व सैनिकों से संबंधित अरबों रुपये का रेमिटेंस और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं। पूर्व गोरखा सैनिकों ने सरकार से भारत के साथ तत्काल वार्ता शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि अग्निवीर योजना का पांच वर्ष का परीक्षण चरण जून, 2027 में पूरा होने वाला है, इसलिए नेपाल सरकार को अभी से भारत सरकार के साथ संवाद और वार्ता शुरू करनी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास