ट्रेड यूनियनों की नेपाल सरकार को चेतावनी, मजदूरों के अधिकार न छीनने के दिए सुझाव
काठमांडू, 17 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल की ट्रेड यूनियनों ने सरकार को अपने ट्रेड यूनियन अधिकारों को न छीनने की चेतावनी दी है। साथ ही, संघीय सिविल सेवा कानून में किन-किन विषयों को शामिल किया जाना चाहिए, इस बारे में भी सुझाव दिए हैं। उन्होंने ट्रेड यूनियनों पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध और हस्तक्षेप को बंद करने की मांग की है।
दरअसल, मंत्रिपरिषद ने राजनीतिक दलों से आबद्ध ट्रेड यूनियन को खारिज किए जाने के आदेश दिए थे, लेकिन इस फैसले के तीन सप्ताह बाद भी राजनीतिक दलों से जुड़े कर्मचारी ट्रेड यूनियन भंग नहीं किए गए हैं। उल्टे, वे संगठित रूप में सरकार के सामने अपनी मांगों के साथ उपस्थित हुए हैं।
नेपाली कांग्रेस से संबद्ध नेपाल निजामती कर्मचारी यूनियन, यूएमएल से संबद्ध नेपाल निजामती कर्मचारी संगठन, माओवादी से संबद्ध नेपाल राष्ट्रीय निजामती कर्मचारी संगठन, तत्कालीन एकीकृत समाजवादी से संबद्ध एकीकृत सरकारी कर्मचारी संगठन मधेशी दलों से निकट मधेशी निजामती संगठन तथा एक स्वतंत्र संगठन सहित कुल 6 संगठनों ने शुक्रवार को संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय के सचिव के समक्ष अपनी मांगें प्रस्तुत कीं।
उनकी मांग है कि मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के समझौतों के अनुरूप ट्रेड यूनियन अधिकारों का पूर्ण रूप से कार्यान्वयन किया जाए। संयुक्त मांगपत्र में कहा गया है कि नेपाल के संविधान की धारा 17(2)(घ) के अनुसार संघ-संगठन बनाने की स्वतंत्रता का पालन किया जाए। संविधान की धारा 34 में वर्णित श्रम संबंधी अधिकारों को लागू किया जाए। ट्रेड यूनियनों पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध और हस्तक्षेप को समाप्त किया जाए।
इन कर्मचारी संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ट्रेड यूनियन खारिज करने के अपने फैसले को वापस नहीं लिया, तो सभी संगठन मिलकर संयुक्त रूप से सरकार के खिलाफ आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास