नेपाल के 14 छात्र संगठनों ने प्रतिबंध लगाने के फैसले पर विरोध जताया
काठमांडू, 01 अप्रैल (हि.स.)। सरकार की ओर से छात्र संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के बाद प्रमुख राजनीतिक दल नेपाली कांग्रेस, यूएमएल माओवादी तथा मधेशी दलों से जुड़े 14 छात्र संगठनों ने आपत्ति जताई है।
छात्र संगठनों ने संयुक्त वक्तव्य में कहा है कि छात्र आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की अनदेखी करते हुए शिक्षा क्षेत्र की जटिल समस्याओं के समाधान के नाम पर छात्र संगठनों पर प्रतिबंध और निषेध लगाने की सरकार की प्रवृत्ति दीर्घकाल में सकारात्मक परिणाम नहीं दे सकती। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालयों में मौजूद अनेक समस्याओं के वास्तविक कारणों की खोज और समाधान के लिए राज्य को व्यापक अध्ययन के बाद अपनी नीतियां और कार्यक्रम तय करने चाहिए थे, लेकिन इसे नजरअंदाज करते हुए शिक्षा क्षेत्र की सभी विकृतियों का बोझ छात्र संगठनों पर थोपना सरकार का अपरिपक्व और सतही दृष्टिकोण है।
वक्तव्य में यह भी कहा गया है कि लंबे समय से छात्र आंदोलन को समयानुकूल रूप से पुनर्संरचना करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है और इस विषय पर बहस भी जारी है। आगे कहा गया है कि विचार के आधार पर किसी संगठन में शामिल होने का अधिकार नेपाल के संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है। किसी के विचारों पर प्रतिबंध लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के भी विपरीत है। ऐसा प्रयास युवाओं के स्वाभाविक राजनीतिक सामाजिककरण की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
वक्तव्य में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि छात्र आंदोलन के पुनर्संरचना को सरकार की प्राथमिकता में रखना सकारात्मक और स्वागतयोग्य है, लेकिन सुधार के नाम पर विचार, अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता पर रोक लगाने वाला कोई भी निर्णय अपरिपक्व, गैर-राजनीतिक, अप्राकृतिक, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक होगा। संयुक्त छात्र संगठनों ने यह भी कहा है कि वे छात्र आंदोलन में मौजूद विकृतियों को सुधारते हुए रचनात्मक और सृजनात्मक तरीके से आगे बढ़ने के लिए सरकार के साथ संवाद, सहयोग और सुधार के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहेंगे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास