नेपाली नववर्ष पर सलहेश महोत्सव के लिए लगने लगा भारतीय श्रद्धालुओं का जमघट
काठमांडू, 13 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल के नववर्ष पर हर वर्ष 14 अप्रैल को होने वाले 'सलहेश महोत्सव' के लिए भारतीय श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है। सीमावर्ती सिरहा जिले के लहान स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल पर फूलबारी मेला शुरू होने से दो दिन पहले ही भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी है।
मेला व्यवस्थापन समिति के अध्यक्ष दशमीलाल चौधरी के अनुसार मंदिर के सामने स्थित हारम के पेड़ पर इस वर्ष भी सलहेश फूल खिलना शुरू हो गया है, हालांकि यह अभी पूरी तरह खिला नहीं है। करीब 9 बीघा क्षेत्र में फैले इस फूलबारी क्षेत्र में अभी से श्रद्धालुओं का आना जारी है। श्रद्धालु दिन-रात फूलबारी परिसर में पेड़ों के नीचे टेंट लगाकर रहने लगे हैं। बढ़ती पर्यटकों की संख्या के साथ यहां बुनियादी सुविधाओं की कमी भी महसूस की जा रही है। स्थानीय निवासी वीरेन्द्र चौधरी ने श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थित धर्मशाला की कमी होने की शिकायत की है।
लोककथा के अनुसार महिषोथा (सिरहा) में जन्मे लोकनायक राजा सलहेश के प्रेम स्थल के रूप में इस फूलबारी को माना जाता है। राजा सलहेश और उनकी प्रेमिका मालिनी के प्रेम के प्रतीक के रूप में इस फूल को देखा जाता है। चौथी शताब्दी के लोकनायक राजा सलहेश की वीरता, साहस और प्रेम से जुड़ी गाथाओं की स्मृति में हर वर्ष वैशाख 1 को यहां मेला आयोजित किया जाता है। नेपाल के तराई क्षेत्र सहित भारत के बिहार, उत्तरप्रदेश में पासवान समुदाय के इष्टदेव माने जाने वाले सलहेश की पूजा करने से संतान प्राप्ति और विभिन्न रोगों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
हालांकि, सरकार ने इस क्षेत्र को नए पर्यटन गंतव्य के रूप में सूचीबद्ध किया है, लेकिन अब तक ठोस विकास नहीं हो पाया है। जिला उद्योग वाणिज्य संघ सिरहा और लहान के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता ने कहा कि यदि तीनों स्तर की सरकारें और संबंधित निकाय मिलकर एकीकृत मास्टर प्लान बनाएं, तो इस क्षेत्र को एक आकर्षक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास