नेपाल के सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने अपनी ही पार्टी की सरकार से पूछा– ‘सरकार कहां है?’

 


काठमांडू, 07 अगस्त (हि.स.)। नेपाल के नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं को उठाते हुए शुक्रवार को संसद में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के ही सांसदों ने सरकार से सवाल किया– ‘सरकार कहां है?’

खाना पकाने वाली गैस की कमी, रासायनिक खाद का संकट, गरीब नागरिकों के अंतिम संस्कार का खर्च, किसानों को बंदरों से हो रही परेशानी से लेकर बोन मैरो कैंसर के इलाज तक के मुद्दे उठाते हुए सांसदों ने सरकार से नागरिकों की पीड़ा के बीच दिखाई देने का आग्रह किया।

प्रतिनिधिसभा के आकस्मिक समय में आरएसपी सांसद इंदिरा राना ने गैस की कमी के कारण नागरिकों को हो रही परेशानी की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया। उन्होंने कहा, “गैस नहीं मिलने से जनता परेशान है। जल्द से जल्द गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मैं सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहती हूं।”

आरएसपी सांसद रमेश प्रसाईं ने चुनाव के दौरान पार्टी द्वारा दिए गए ‘नो लाइन, ओनली ऑनलाइन’ नारे की याद दिलाई। उन्होंने कहा, “कभी-कभी मुझे लगता है कि मेरे ही गाल पर मेरा ही थप्पड़ पड़ रहा है।” उन्होंने चुनाव के समय सरकारी कार्यालयों में ‘नो लाइन’ और आरएसपी के शासन में ‘ओनली ऑनलाइन’ की बात को लेकर दिए गए अपने भाषण का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि आरएसपी के नेतृत्व में दो-तिहाई बहुमत की सरकार बनने के बावजूद आम नागरिकों को बदलाव महसूस नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, “आज जनता चावल पकाने के लिए गैस लेने के लिए दिनभर, रातभर और आधी रात तक लाइन में खड़ी है। यह दृश्य देखकर मुझे सचमुच शर्मिंदगी महसूस होती है।”

इसी तरह सांसद कमल सुवेदी ने भी बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने, कालाबाजारी करने या आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों की तत्काल निगरानी करने और गैस की सहज तथा नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।

ऐसे ही आरएसपी सांसद टीका संग्रौला ने गरीब नागरिकों के अंतिम संस्कार के खर्च का मुद्दा संसद में उठाया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह पशुपति आर्यघाट में अपने रिश्तेदार का अंतिम संस्कार करने के लिए पैसे नहीं होने की बात कहते हुए एक नागरिक ने उनसे मदद की उम्मीद में फोन किया था। उन्होंने कहा, “उस फोन ने मुझे कुछ देर के लिए झकझोर दिया और दुखी कर दिया। एक नागरिक जीवित रहते हुए विभिन्न मदों में राज्य को कर देता है। कम से कम उसकी मृत्यु के समय अंतिम संस्कार को सम्मानजनक और सहज बनाना राज्य की जिम्मेदारी होनी चाहिए।”

संग्रौला ने कहा, “इस देश का कोई गरीब और असहाय नागरिक जब मरता है तो कम से कम एक गट्ठर लकड़ी, शव रखने की जगह और एक माचिस की तीली राज्य को मुफ्त उपलब्ध करानी चाहिए।” उन्होंने कहा कि राज्य का काम केवल कर वसूलना नहीं, बल्कि गरीब और वंचित नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है।

उन्होंने सवाल किया, “जिसका कोई नहीं है, उसका सरकार को सहारा बनना चाहिए। जन्म लेकर पालने में झूलते समय कर देने वाला नागरिक, मरकर चिता पर जाते समय भी बिना शर्त मुफ्त में धुएं में उड़ने का अधिकार क्यों नहीं रख सकता?” सांसद ने कहा कि किसी गरीब नागरिक की मृत्यु के समय राज्य को उसे यह एहसास दिलाना चाहिए कि ‘मैं तुम्हारा अभिभावक हूं, मैं तुम्हारे साथ हूं।’

सांसद पारशमणि गेलाल ने रासायनिक खाद की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “अगर वास्तव में खाद नहीं है तो मंत्रालय को स्पष्ट रूप से बता देना चाहिए कि खाद नहीं है। अगर मंत्रालय कह रहा है कि पर्याप्त खाद है, तो संबंधित नगरपालिकाओं के मेयरों के साथ समन्वय करके हम खाद वहां तक पहुंचाने के लिए तैयार हैं। सांसदों को भी इसमें भूमिका दी जानी चाहिए।”

सत्तारूढ़ दल के सांसदों द्वारा ही गैस, खाद और गरीबों की बुनियादी समस्याओं को लेकर सरकार से जवाब मांगने से संसद में सरकार की कार्यप्रणाली और आम नागरिकों तक सरकारी राहत पहुंचने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास