नेपाल में परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और स्मार्ट वॉच नष्ट किए गए, विरोध में छात्र संगठनों का प्रदर्शन

 


काठमांडू, 08 जून (हि.स.)। नेपाल में दसवीं और कक्षा-12 की परीक्षाओं के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन तथा स्मार्ट वॉच को पानी में डुबोकर नष्ट किए जाने की घटना के विरोध में सिरहा जिला में संयुक्त छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। छात्रों ने सिरहा जिला कैंपस के सामने से जिला प्रशासन कार्यालय तक रैली निकालकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने नष्ट किए गए मोबाइल फोन का उचित मुआवजा देने, प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाने और निजी संपत्ति पर दमनात्मक कार्रवाई बंद करने की मांग की।

इसके साथ ही छात्र संगठनों ने प्रमुख जिला अधिकारी के माध्यम से जिला प्रशासन कार्यालय, सिरहा को ज्ञापन पत्र सौंपते हुए घटना की निष्पक्ष जांच, पीड़ितों को मुआवजा तथा जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन पत्र में कहा गया है कि संविधान द्वारा प्रदत्त संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन करते हुए बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों को नष्ट किया गया, जो आपत्तिजनक है।

छात्र संगठनों का कहना है कि परीक्षा में नकल या अनियमितता में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन किसी की निजी संपत्ति को नष्ट करने का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे परीक्षा में नकल या अनियमितता के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि विधि, कानून, न्याय और जवाबदेही के पक्षधर हैं। ज्ञापन पत्र में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों को उचित क्षतिपूर्ति देने की मांग की गई है।

जिला प्रशासन कार्यालय, सिरहा ने गत मार्च महीने में आयोजित दसवीं और कक्षा-12 की परीक्षाओं के दौरान परीक्षार्थियों से जब्त किए गए लगभग 500 मोबाइल फोन और स्मार्ट वॉच पानी में डुबाकर नष्ट कर दिए थे। प्रशासन के अनुसार सात एप्पल का आईफोन, विभिन्न कंपनियों के 489 एंड्रॉयड मोबाइल फोन तथा पांच स्मार्ट वॉच बरामद किए गए थे। बताया गया है कि इन उपकरणों का अनुमानित बाजार मूल्य एक करोड़ नेपाली रुपये से अधिक था।

समिति ने दावा किया कि जिला प्रहरी कार्यालय परिसर में मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों को 24 घंटे तक पानी में डुबोकर रखा गया, जिससे वे दोबारा उपयोग के योग्य न रहें, और बाद में उन्हें नष्ट कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की मर्यादा बनाए रखने और भविष्य में ऐसे उपकरणों के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया। अभिभावकों, कानूनी विशेषज्ञों और छात्र संगठनों ने इस निर्णय पर गंभीर असंतोष व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच, क्षतिपूर्ति और न्याय की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास