पोखरा हवाईअड्डे निर्माण में भ्रष्टाचार, पूर्व वित्त मंत्री ज्ञानेन्द्र कार्की को भी आरोपित बनाया गया

 


काठमांडू, 07 मई (हि.स.)। नेपाल के पोखरा हवाईअड्डे निर्माण में हुए कथित भ्रष्टाचार मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने गुरुवार को पूरक चार्जशीट दाखिल की, जिसमें पूर्व वित्त मंत्री ज्ञानेन्द्र कार्की को भी आरोपित बनाया गया है। इसके साथ ही पोखरा अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल निर्माण भ्रष्टाचार प्रकरण में जुड़े पूर्व मंत्रियों की संख्या बढ़कर छह हो गई है।

ब्यूरो ने तीन अलग-अलग मुकदमे दायर किए हैं। इससे पहले पिछले वर्ष दिसंबर में एंटी करप्शन ब्यूरो ने पांच पूर्व मंत्रियों सहित कई लोगों के खिलाफ विशेष अदालत में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कराया था। उस समय पूर्व मंत्री भीम आचार्य, दीपक अमात्य, राम कुमार श्रेष्ठ, राम शरण महत और पोस्ट बहादुर बोगटी को आरोपित बनाया गया था। गुरुवार को दायर नए मामले में पूर्व मंत्री ज्ञानेन्द्र कार्की का नाम भी जोड़ा गया है। पूर्व मंत्री पोस्टबहादुर बोगटी का निधन हो चुका है, इसलिए उनकी पत्नी राममाया बोगटी को प्रतिवादी बनाया गया है।

विशेष अदालत के प्रवक्ता कृष्ण शरण लामिछाने के अनुसार ब्यूरो का आरोप है कि ठेका समझौते में निर्धारित प्रावधानों के विपरीत ठेकेदार को राजस्व में छूट देकर भ्रष्टाचार किया गया। इसी आधार पर आरोपपत्र दायर किया गया है। ब्यूरो ने इस मामले में 3 अरब 62 करोड़ 5 लाख 22 हजार 160 नेपाली रुपये के भ्रष्टाचार होने की बात कही है। इस मामले में तत्कालीन वित्त मंत्री कार्की के अलावा तत्कालीन वित्त सचिव शंकर प्रसाद अधिकारी, तत्कालीन पर्यटन सचिव महेश्वर न्यौपाने, तत्कालीन सह सचिव सुरेश आचार्य और दुण्डुराज घिमिरे, पूर्व सचिव केवल भण्डारी, नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के तत्कालीन महानिर्देशक सञ्जीव गौतम तथा निवर्तमान महानिर्देशक प्रदीप अधिकारी, उपसचिव युवराज पाण्डे, शाखा अधिकृत उर्मिला भण्डारी और इंजीनियर योगेश अर्याल के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया गया है।

इससे पहले गत मार्च में भी एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक अन्य मामला दायर किया था, जिसमें 21 व्यक्तियों और 2 कंपनियों को प्रतिवादी बनाया गया था। उस मामले में तत्कालीन पर्यटन सचिव केदार बहादुर अधिकारी तथा नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के पूर्व महानिर्देशक सञ्जीव गौतम और राजन पोखरेल समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। ब्यूरो ने विमानस्थल निर्माण में राजस्व छूट से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में 46 करोड़ 15 लाख 84 हजार 434 नेपाली रुपये के भ्रष्टाचार होने का दावा किया है।

पहला मामला दर्ज करते समय ही ब्यूरो ने संकेत दिया था कि पोखरा विमानस्थल निर्माण में राजस्व छूट और अन्य वित्तीय अनियमितताओं की अलग से जांच चल रही है और जल्द ही अतिरिक्त मुकदमे दायर किए जाएंगे। जांच में यह भी पाया गया कि विमानस्थल परियोजना के लिए परामर्शदाता नियुक्ति में लागत निर्धारण और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ हुईं। ब्यूरो द्वारा दायर चार्जशीट के अनुसार एपीसी में परामर्शदाता नियुक्ति की अधिकतम लागत 33 करोड़ 94 लाख रुपये तय थी और इसका भुगतान ऋण समझौते की राशि से होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

इसके बजाय नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के आंतरिक बजट से खर्च वहन करने के लिए 50 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत तैयार की गई, जबकि नियम अनुसार इस बजट का उपयोग इस उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता था। ब्यूरो का आरोप है कि परामर्श सेवा का 42 करोड़ 89 लाख रुपये का समझौता किया गया और यह जानते हुए भी कि प्राधिकरण का अलग बजट इस कार्य में खर्च नहीं किया जा सकता, उसी बजट से भुगतान किया गया। अब तक लगभग 40 करोड़ 68 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है।

जांच एजेंसी का दावा है कि परियोजना में वित्तीय हिनामिना, सरकारी हानि और बजट दुरुपयोग हुआ है। इसके अलावा ठेका समझौते में लागत अनुमान से अधिक रकम दर्शाकर अनुचित भुगतान किए गए, जिससे करोड़ों रुपये की अतिरिक्त आर्थिक क्षति हुई।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास