नेपाल के विश्वविद्यालयों और कॉलेज परिसर से छात्र संगठनों को हटाने के लिए प्रधानमंत्री का निर्देश
काठमांडू, 20 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने देशभर के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के कुलपतियों को कैंपसों से राजनीतिक दलों से संबद्ध छात्र और कर्मचारी संगठनों को तुरंत हटाने के निर्णय को लागू करने का निर्देश दिया है।
यह निर्देश सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में एक बैठक के दौरान दिया गया। नेपाल भर के विश्वविद्यालयों और अकादमियों के कुलपतियों के साथ हुई यह बैठक तीन घंटे से अधिक समय तक चली। प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी परिस्थिति में राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से दल-सम्बद्ध संरचनाओं को हटाने में कोई भी कानून बाधा नहीं बनेगा।
शाह ने अस्पतालों, कैंपसों और स्कूलों को “पवित्र स्थल” बताते हुए कहा कि इन जगहों पर किसी भी राजनीतिक दल का झंडा, प्रभाव या संगठनात्मक संरचना स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जो लोग राजनीति में रुचि रखते हैं, वे अपने पेशेवर दायित्वों से अलग होकर पूर्णकालिक रूप से राजनीति करें। प्रधानमंत्री ने आगे विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक कैलेंडर का सख्ती से पालन करने और परीक्षा परिणाम एक महीने के भीतर प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया।
प्रधानमंत्री शाह ने निर्देश दिया कि यदि राजनीतिक संरचनाओं को हटाने के दौरान कोई सुरक्षा समस्या उत्पन्न होती है, तो तुरंत संबंधित मंत्रालय या प्रधानमंत्री सचिवालय को सूचित किया जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार आवश्यक सभी सहयोग, जिसमें सुरक्षा समन्वय भी शामिल है, उपलब्ध कराएगी और पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। शाह ने कुलपतियों से आत्मविश्वास के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का भी आह्वान किया।
बैठक के दौरान नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. धनश्वर नेपाल ने बताया कि छात्र संगठनों को हटाने के प्रयासों के दौरान धमकी और हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
इसी प्रकार, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा कि मंत्रालय पहले ही राजनीतिक दलों से संबद्ध संरचनाओं को समाप्त करने का निर्देश जारी कर चुका है और मौजूदा कानून इसके कार्यान्वयन में बाधा नहीं हैं।
बैठक में त्रिभुवन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. दीपक आर्याल ने बताया कि “जेन-ज़ी” आंदोलन और हालिया चुनावों के बाद छात्र और कर्मचारी संगठन धीरे-धीरे निष्क्रिय होते जा रहे हैं।
मध्य पश्चिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. ध्रुव कुमार गौतम, पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. बिजु कुमार थपलिया और सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. हेमराज पंत ने कहा कि कुछ परिसरों में अभी भी राजनीतिक तनाव बना हुआ है।
हालांकि, अन्य विश्वविद्यालयों और अकादमियों के कुलपतियों ने बताया कि उनके संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियां न्यूनतम हैं और कड़े प्रशासन के जरिए शैक्षणिक क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव को समाप्त किया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास