नेपाल : प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से राजतंत्र समर्थक नेता राजेन्द्र लिङ्देन की मुलाकात, संविधान की मूल संरचना बदलने पर सरकार को समर्थन देने के संकेत
काठमांडू, 16 जुलाई (हि.स.)। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने गुरुवार को प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय में राजेन्द्र लिङ्देन से मुलाकात की।
प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार, बैठक में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम, देश की वर्तमान स्थिति तथा आपसी हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (आरपीपी) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बुद्धिमान तामाङ तथा पार्टी की केंद्रीय समिति सदस्य एवं प्रतिनिधि सभा सांसद खुश्बु ओली भी उपस्थित थीं।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में लिङ्देन ने कहा कि यदि सरकार संविधान की मूल संरचना में बदलाव करने को तैयार होती है, तो आरपीपी सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन कार्यदल से नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) सहित अन्य दलों के हटने का हवाला देते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि कुछ शर्तों के साथ आरपीपी सरकार के साथ सहयोग कर सकती है।
लिङ्देन ने कहा, अन्य दलों का आरोप है कि सरकार गणतंत्र और संघीय व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि सरकार वास्तव में उसी दिशा में बढ़ना चाहती है, तो आरपीपी उसका समर्थन करने के लिए तैयार है।
उन्होंने दोहराया कि आरपीपी वर्तमान गणतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और संघीय शासन व्यवस्था को बदलने के अपने पुराने रुख पर कायम है।
उन्होंने कहा, हम लगातार कहते आए हैं कि गणतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और संघीय व्यवस्था में परिवर्तन होना चाहिए। यदि सरकार मौजूदा व्यवस्था को समाप्त करने का प्रस्ताव लाती है, तो हम उसका समर्थन करेंगे।
लिङ्देन ने यह भी कहा कि आरपीपी वर्तमान राष्ट्रपति व्यवस्था के स्थान पर राजशाही की पुनर्स्थापना का पक्षधर है। साथ ही पार्टी का मानना है कि वर्तमान तीन-स्तरीय शासन व्यवस्था की बजाय केवल संघीय और स्थानीय स्तर वाली दो-स्तरीय शासन व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री से संविधान में धर्मनिरपेक्षता के प्रावधान को हटाकर नेपाल को पुनः हिन्दू राष्ट्र घोषित करने का भी आग्रह किया।
लिङ्देन ने कहा, यदि अन्य राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं, तो आरपीपी सरकार का समर्थन करने के लिए तैयार है। हम विपक्ष में हैं, लेकिन यदि सरकार गणतंत्र और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाती है, तो हम सहयोग करेंगे।
हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आरपीपी संसद में रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाती रहेगी।
उन्होंने कहा, गणितीय और वैचारिक दोनों दृष्टि से हम विपक्ष में हैं। आरपीपी मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी, लेकिन जिन मुद्दों पर हमारी विचारधारा सरकार से मेल खाएगी, उन पर हम सहयोग करने के लिए तैयार रहेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास