नेपाल में एक महीने के दौरान तेल की कीमते चौथी बार बढ़ाने का फैसला

 


काठमांडू, 10 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल में एक महीने के भीतर चौथी बार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में भारी वृद्धि की गई है। नेपाल आयल निगम ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का हवाला देते हुए पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ा दिए हैं।

निगम के निदेशक मंडल के निर्णय के बाद नई दरें आज शुक्रवार से लागू हो गई हैं। पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, खाना पकाने वाला एलपीजी गैस और विमान ईंधन—सभी के दाम बढ़ाए गए हैं।

संशोधित दरों के अनुसार, पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि हुई है, जबकि डीजल और केरोसिन में प्रति लीटर 25-25 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। खाना पकाने वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 100 रुपये की वृद्धि हुई है और घरेलू विमान ईंधन 6 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है।

नई कीमतों के अनुसार, नेपाल में अब पेट्रोल 219 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल और केरोसिन 207 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2,010 रुपये और घरेलू विमान ईंधन 257 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है।

सरकार ने कहा है कि सीमा शुल्क और अवसंरचना विकास कर में 50 प्रतिशत की कटौती के बावजूद लगातार हो रहे नुकसान के कारण कीमत बढ़ाना आवश्यक हो गया था। निगम के द्वारा जारी बयान के अनुसार, ताजा मूल्य वृद्धि के बाद भी हर पखवाड़े लगभग 7.81 अरब रुपये का घाटा होने का अनुमान है।

पिछले एक महीने में यह चौथी बार है जब नेपाल आयल निगम ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों के भारी वृद्धि की है। ईरान अमेरिका युद्ध के कारण तेल आयात में आई कमी को देखते हुए लगातार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी की जा रही है।

हालांकि सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थ पर लगने वाले सरकारी टैक्स में ५० प्रतिशत कम करने का फैसला भी लिया लेकिन इससे इसकी कीमतों में कोई कमी नहीं आई और जनता को उससे राहत नहीं मिल पाई है। पहले ही नेपाल आयल निगम घाटे में रह कर तेल की कीमतें तय कर रही हैं। सरकार के द्वारा टैक्स कम करने से घाटा को कुछ कम किया जा सका है पर उससे तेल की कीमतों के कोई कमी नहीं आई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास