नेपाल के नए प्रधान न्यायाधीश के रूप में जस्टिस मनोज शर्मा की नियुक्ति, शपथ और पदभार ग्रहण
काठमांडू, 19 मई (हि.स.)। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश डॉ मनोज कुमार शर्मा ने देश के नए प्रधान न्यायाधीश के रूप में औपचारिक नियुक्ति और शपथ ग्रहण के बाद पदभार संभाल लिया है।
राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने मंगलवार को संसदीय सुनुवाई समिति द्वारा उनके नाम को सर्वसम्मति से अनुमोदित किए जाने के बाद उन्हें प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया।
नियुक्ति के बाद शर्मा ने आज ही पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। वे बुधवार से सर्वोच्च अदालत में अपनी जिम्मेदारियाँ संभालेंगे, जिसमें पीठ गठन और दैनिक मामलों के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी शामिल है।
इस नियुक्ति के साथ शर्मा नेपाल के 33वें प्रधान न्यायाधीश बन गए हैं। नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 129(4) के अनुसार उनका कार्यकाल छह वर्ष का होगा।
उनकी नियुक्ति पर विशेष ध्यान इसलिए गया क्योंकि संवैधानिक परिषद ने सर्वोच्च अदालत की परंपरागत वरिष्ठता आधारित व्यवस्था से हटकर उम्मीदवार की सिफारिश की थी।
परिषद ने कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल तथा अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश कुमार रेग्मी और हरि प्रसाद फुयाल को दरकिनार करते हुए वरिष्ठता क्रम में चौथे स्थान पर रहे शर्मा का चयन किया।
इस निर्णय के कारण संवैधानिक परिषद के भीतर भी मतभेद देखने को मिला। राष्ट्रिय सभा के अध्यक्ष नारायण दाहाल और विपक्षी प्रतिनिधि भीष्मराज आङ्देम्बे ने स्थापित न्यायिक परंपरा से हटने पर असहमति जताई।
उनका तर्क था कि नेपाल की न्यायपालिका लंबे समय से प्रधान न्यायाधीश की सिफारिश में वरिष्ठता को मुख्य आधार मानती आई है और बिना मजबूत संस्थागत कारण के इस परंपरा से हटना उचित नहीं होगा।
वहीं, निर्णय के समर्थकों का कहना था कि न्यायपालिका के प्रमुख का चयन करते समय केवल वरिष्ठता नहीं, बल्कि योग्यता, पेशेवर क्षमता और न्यायिक अनुभव को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
इस फैसले ने कानूनी विशेषज्ञों और विभिन्न पक्षों का भी ध्यान आकर्षित किया। नेपाल बार एसोसिएशन सहित कुछ कानूनी जानकारों ने चेतावनी दी कि स्पष्ट कारण बताए बिना वरिष्ठ न्यायाधीशों को नजरअंदाज करना न्यायिक नियुक्तियों में कार्यपालिका के प्रभाव को लेकर चिंता पैदा कर सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास