नेपाल सरकार ने भूमिहीन परिवारों को भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र वितरण शुरू किया
काठमांडू, 03 जुलाई (हि.स.)। नेपाल सरकार ने भूमिहीन परिवारों को औपचारिक रूप से भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र वितरण शुरू कर दिया है। इसके साथ ही नेपाल की सबसे पुरानी भूमि सुधार समस्याओं में से एक के समाधान की दिशा में सरकार की 100-दिवसीय कार्ययोजना के तहत महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
यह पहल सरकार की 100-बिंदु कार्ययोजना के तहत शुरू की गई है, जिसे वर्तमान सरकार के गठन के एक दिन बाद 28 मार्च को सार्वजनिक किया गया था। कार्ययोजना के 91वें बिंदु में भूमिहीन नागरिकों को भूमि का कानूनी स्वामित्व प्रदान करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। 1990 में बहुदलीय लोकतंत्र की पुनर्बहाली के बाद से लगातार बनी सरकारों ने भूमिहीन सुकुम्बासी और अव्यवस्थित बस्तियों की समस्या समाधान के लिए विभिन्न आयोग बनाए थे। हालांकि, इन आयोगों की अक्सर इस बात को लेकर आलोचना होती रही कि वे स्थायी समाधान देने के बजाय राजनीतिक नियुक्तियों का मंच बन गए।
इसी पुरानी व्यवस्था से अलग रास्ता अपनाते हुए वर्तमान सरकार ने पूर्व भूमि आयोग को भंग कर उसकी जगह भूमि व्यवस्थापन समिति का गठन किया। व्यापक अभियान के तहत सरकार ने 25 अप्रैल से काठमांडू घाटी सहित देशभर के उच्च जोखिम वाले सुकुम्बासी बस्तियों में हटाने की कार्रवाई शुरू की। इस अभियान से विस्थापित परिवारों को फिलहाल अस्थायी आश्रय स्थलों में रखा गया है, जबकि अधिकारी सत्यापन और तथ्य संकलन में जुटे हैं।
प्रक्रिया को तेज करने के लिए भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा संघीय मामलों के मंत्रालय ने नए संचालन निर्देश तैयार किए हैं। इसके तहत भूमिहीन दलित, भूमिहीन सुकुम्बासी और अव्यवस्थित बस्तियों में रहने वालों से जुड़े मुद्दों के समाधान की जिम्मेदारी भूमि व्यवस्थापन समिति को सौंपी गई है। 2 जून को हुई मंत्रिपरिषद बैठक ने बलभद्र बस्तोला को समिति का प्रमुख नियुक्त किया।
समिति के सूचना अधिकारी संजीव कुमार साह के अनुसार पात्र लाभार्थियों का डिजिटल डाटाबेस तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रविष्टि से निगरानी काफी आसान होगी और स्थानीय सरकारें इस प्रक्रिया पर काम कर रही हैं। बजट समायोजन के कारण कुछ देरी हुई है, लेकिन काम आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार अब तक 12 लाख 48 हजार लोगों की जानकारी डिजिटल प्रणाली में दर्ज की जा चुकी है, जबकि पूर्व सरकारों के समय यह संख्या लगभग 11 लाख 20 हजार थी।
हालांकि, साह ने माना कि देश की भूमिहीनता समस्या का समाधान अभी भी जटिल चुनौती है। उन्होंने कहा कि जमीनी वास्तविकता जितनी सरल दिखती है, उतनी है नहीं। वर्तमान गति से भी पूरी प्रक्रिया में काफी समय लगेगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार 1,000 दिनों यानी लगभग 2 वर्ष 9 महीने के लक्ष्य के भीतर समस्या का पूर्ण समाधान कर सकती है, तो उन्होंने इसे चुनौतीपूर्ण बताया।
सरकार ने प्रमाणपत्र वितरण के पहले चरण की शुरुआत के लिए बर्दिया जिले को चुना, क्योंकि वहां सत्यापन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी।
भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा संघीय मामलों की मंत्री प्रतिभा रावल ने 24 जून को सामाजिक सञ्जाल के माध्यम से घोषणा की थी कि जुलाई से भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र वितरण शुरू होगा। इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप सरकार ने शुक्रवार को बर्दिया के बढैयाताल गाउँपालिका-4 में नदी किनारे रहने वाले 29 परिवारों को भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र प्रदान किए। लाभार्थियों में 2 भूमिहीन दलित परिवार और 27 भूमिहीन सुकुम्बासी परिवार शामिल थे, जो लगभग 15 वर्षों से वहां रह रहे थे।
बर्दिया के प्रमुख जिल्ला अधिकारी तथा जिल्ला भूमि व्यवस्थापन समिति के प्रमुख गोगन बहादुर हमाल ने कहा कि हमने परिवारों को उसी भूमि का स्वामित्व प्रमाणपत्र दिया है, जिस पर वे लंबे समय से बसे हुए हैं। मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुसार, 2,000 वर्गमीटर से अधिक भूमि पर कब्जा किए हुए भूमिहीन सुकुम्बासियों को निर्धारित सीमा तक ही स्वामित्व दिया जाएगा, जबकि शेष भूमि सरकार के स्वामित्व में रहेगी। हमाल ने बताया कि सरकार की 100-दिवसीय कार्ययोजना के तहत भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र वितरण शुरू करने वाला बर्दिया पहला जिला बना है, क्योंकि यहां का अधिकांश प्रारंभिक काम पहले के आयोगों द्वारा पूरा किया जा चुका था।
उन्होंने कहा कि हमने पूर्व आयोगों के कार्य को आधार बनाकर नई समिति के मानकों और प्रक्रियाओं के अनुसार शेष सत्यापन पूरा किया। हमाल के अनुसार बर्दिया में लगभग 13 से 14 हजार भूमिहीन सुकुम्बासी परिवार और 30 से 35 हजार अव्यवस्थित बस्तियों में रहने वाले परिवार हैं। अब समिति जिले की सभी स्थानीय सरकारों तक प्रमाणपत्र वितरण प्रक्रिया विस्तार करने की योजना बना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकारों के दौरान आवश्यक आधारभूत संरचना पहले से तैयार होने के कारण वर्तमान सरकार के लक्ष्यों को पूरा करना अपेक्षाकृत आसान होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास