नेपाल में बनेगा 50 हजार टन क्षमता वाला एलपीजी गैस भंडारण गृह, बिहार के मोतिहारी से नेपाल के सर्लाही तक बिछेगी पाइपलाइन

 




काठमांडू, 27 अक्टूबर (हि.स.)। नेपाल में एलपीजी गैस की आपूर्ति में प्राकृतिक आपदाओं या सड़क अवरोधों के कारण होने वाली किल्लत की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए नेपाल आयल निगम ने गैस भंडारण गृह निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। देश में गैस भंडारण के क्षेत्र में सरकारी उपस्थिति लगभग नगण्य रहने के बीच निगम ने अपने स्वामित्व में भंडारण गृह बनाने और भारत से नेपाल तक अंतरदेशीय गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी तेज कर दी है।

योजना के तहत भारत के मोतिहारी से नेपाल के सर्लाही तक एलपीजी गैस पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके साथ ही सर्लाही में 50 हजार टन क्षमता वाला गैस भंडारण गृह बनाया जाएगा, जो देश की करीब एक महीने की मांग पूरी करने में सक्षम होगा। इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के साथ आवश्यक तकनीकी और रणनीतिक चर्चाएं हो चुकी हैं। फिलहाल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।

नेपाल आयल निगम के एलपीजी एवं एविएशन विभाग के प्रमुख विनीतमणि उपाध्याय के अनुसार, नई दिल्ली में नेपाल और भारत के उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालयों के बीच हुई पांचवीं संयुक्त कार्यदल (जेडब्ल्यूजी) की बैठक में इस परियोजना को आगे बढ़ाने पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी। इसी बैठक के निर्णय के अनुसार, नेपाल आयल निगम और आईओसी के बीच व्यवसाय-से-व्यवसाय (बीटूबी) समिति गठित कर काम किया जा रहा है।

तीन प्रमुख इकाइयों में बनेगा अत्याधुनिक गैस डिपो

निगम की ओर से आईओसी को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार, सर्लाही में बनने वाला गैस डिपो अत्याधुनिक और पूरी तरह स्वचालित होगा। परियोजना को मुख्य रूप से तीन इकाइयों में विकसित करने की योजना है।

पहली इकाई के तहत एक महीने की मांग पूरी करने के लिए 50 हजार टन क्षमता वाला एलपीजी गैस भंडारण गृह बनाया जाएगा। दूसरी इकाई में प्रतिदिन 25 हजार सिलेंडर भरने की क्षमता वाला बॉटलिंग प्लांट स्थापित होगा। तीसरी इकाई के तहत प्रतिदिन कम से कम 100 गैस बुलेट टैंकरों में गैस भरने की क्षमता वाला टैंकर लोडिंग एवं फिलिंग (टीएलएफ) सिस्टम बनाया जाएगा।

विभाग प्रमुख उपाध्याय ने कहा कि इन बुनियादी सुविधाओं के निर्माण से नेपाल में गैस आपूर्ति प्रबंधन में बड़ा बदलाव आएगा। उनके अनुसार, फिलहाल प्राकृतिक आपदा आने या दो-चार दिनों तक सड़क बंद रहने पर देशभर में गैस की भारी किल्लत हो जाती है। 50 हजार टन क्षमता का भंडारण गृह बनने के बाद इस समस्या का स्थायी समाधान संभव होगा।

उन्होंने कहा कि 26 अगस्त को भोटेकोशी में आई आपदा से जलविद्युत परियोजनाओं और राजमार्गों को हुए नुकसान ने गैस आपूर्ति के वैकल्पिक इंतजाम तथा बड़े भंडारण गृह की आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया है।

मोतिहारी से सर्लाही तक 131 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन

प्रस्तावित गैस पाइपलाइन भारत के मोतिहारी से शुरू होकर नेपाल के सर्लाही तक पहुंचेगी। इसकी कुल लंबाई करीब 131 किलोमीटर होने का अनुमान है।

योजना के मुताबिक, मौजूदा मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन के मार्ग का अनुसरण करते हुए गैस पाइपलाइन को बारा जिले के पथलैया तक लाया जाएगा। इसके बाद इसे पूर्व दिशा में सर्लाही तक विस्तारित किया जाएगा। पथलैया से सर्लाही की दूरी लगभग 62 किलोमीटर है।

उपाध्याय के अनुसार, पथलैया से सर्लाही तक सड़क के बाईं ओर पाइपलाइन बिछाने की योजना है। रास्ते में पड़ने वाली नदियों और जलधाराओं को पार कराने के लिए होरिजॉन्टल डायरेक्शनल ड्रिलिंग (एचडीडी) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे नदियों के नीचे से सुरक्षित तरीके से पाइपलाइन गुजारी जा सकेगी।

सर्लाही में निगम के पास 14 बीघा से अधिक जमीन

परियोजना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले भूमि संबंधी मुद्दे को निगम पहले ही सुलझा चुका है। सर्लाही में नेपाल आयल निगम के स्वामित्व में 14 बीघा से अधिक जमीन उपलब्ध है।आईओसी इस जमीन के क्षेत्रफल और अन्य तकनीकी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है, ताकि वहां आवश्यक संरचनाओं का डिजाइन तैयार किया जा सके।

परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं। बीटूबी समिति के माध्यम से कई ऑनलाइन बैठकें हो चुकी हैं और आवश्यक दस्तावेजों का आदान-प्रदान भी किया जा रहा है।

आईओसी ने शुरुआती चरण में 8 इंच और 10 इंच व्यास वाली पाइपलाइन में से उपयुक्त विकल्प को लेकर एक प्रारंभिक रिपोर्ट निगम को सौंपी थी। इसके बाद निगम ने 50 हजार टन भंडारण क्षमता सहित अपनी आवश्यकताओं को शामिल करते हुए प्रस्ताव भेजा।

उपाध्याय के अनुसार, आईओसी ने सर्लाही स्थित जमीन की मिट्टी जांच रिपोर्ट मांगी थी, जिसे भेज दिया गया है। अब कंपनी ने जमीन के अक्षांश-देशांतर सहित नए सर्वेक्षण की रिपोर्ट मांगी है। निगम के मुताबिक, यह रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी है और जल्द ही आईओसी को भेजी जाएगी।

सर्वेक्षण रिपोर्ट और अन्य आवश्यकताओं के आधार पर आईओसी विस्तृत डिजाइन तैयार करेगा। इसके बाद परियोजना को तकनीकी रूप से अंतिम रूप देने का रास्ता साफ होगा।

परियोजना पर खर्च होंगे 25 से 30 अरब रुपये

नेपाल आयल निगम के अनुमान के मुताबिक, पाइपलाइन, भंडारण गृह और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण पर करीब 25 से 30 अरब नेपाली रुपये खर्च हो सकते हैं।

हालांकि, इस भारी निवेश की व्यवस्था कैसे की जाएगी, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। डीपीआर तैयार होने और लागत का सटीक आकलन होने के बाद वित्तीय मॉडल तय किया जाएगा।

उपाध्याय ने कहा कि नेपाल और भारत की सरकारें तय करेंगी कि परियोजना का निर्माण किस वित्तीय मॉडल के तहत किया जाए। भारत सरकार से अनुदान के रूप में परियोजना का निर्माण कराने या किसी अन्य विकल्प पर जाने का फैसला दोनों देशों के उच्च राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर होगा।

लंबी दूरी से गैस ढुलाई पर हर साल खर्च होते हैं 6 अरब रुपये

वर्तमान में नेपाल में खपत होने वाली एलपीजी गैस भारत की विभिन्न रिफाइनरियों से बुलेट टैंकरों के जरिए लाई जाती है। इनमें सबसे नजदीक बरौनी रिफाइनरी है, जो काठमांडू से करीब 500 किलोमीटर दूर है।

इसी तरह दुर्गापुर से गैस लाने में लगभग 700 से 800 किलोमीटर, मथुरा से 900 से 1,000 किलोमीटर और पारादीप से 1,200 से 1,300 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

इतनी लंबी दूरी के कारण गैस टैंकरों को गंतव्य तक पहुंचने में तीन-चार दिन से लेकर एक सप्ताह तक लग जाता है। रास्ते में ट्रैफिक जाम, सीमा शुल्क से जुड़ी प्रक्रियाओं और दुर्घटनाओं का जोखिम भी बना रहता है।

मोतिहारी-सर्लाही पाइपलाइन बनने से इन समस्याओं में काफी कमी आने की उम्मीद है।

उपाध्याय के अनुसार, पाइपलाइन के जरिए सीधे सर्लाही तक गैस पहुंचने और वहां भंडारण की सुविधा बनने से लंबी दूरी की ढुलाई का खर्च बचेगा। वर्तमान में केवल गैस परिवहन पर नेपाल का सालाना करीब 6 अरब रुपये खर्च होता है।

उन्होंने कहा कि सर्लाही में बनने वाले स्वचालित डिपो से कम समय में गैस बुलेट टैंकरों में भरकर काठमांडू सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भेजी जा सकेगी।

नेपाली गैस टैंकरों को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

इस परियोजना का एक प्रमुख लाभ नेपाली गैस परिवहन व्यवसायियों को मिलने वाला अवसर भी होगा।

वर्तमान में नेपाल में गैस ढुलाई के लिए 600 से 700 भारतीय बुलेट टैंकरों का इस्तेमाल किया जाता है। भारत की रिफाइनरियों से गैस लाने की व्यवस्था के कारण भारतीय परिवहन कंपनियों पर नेपाल की निर्भरता काफी अधिक है।

सर्लाही तक पाइपलाइन से गैस पहुंचने के बाद भारत से गैस लाने के लिए भारतीय टैंकरों पर निर्भरता कम हो सकेगी। इसके बाद सर्लाही से नेपाल के विभिन्न हिस्सों तक गैस पहुंचाने के लिए नेपाली व्यवसायियों के टैंकरों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

उपाध्याय ने कहा कि नेपाली व्यवसायी अपने गैस बुलेट टैंकरों का संचालन कर सकेंगे, जिससे परिवहन क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही, गैस ढुलाई के लिए विदेश जाने वाली बड़ी रकम देश के भीतर ही रह सकेगी।

देशभर में रोजाना 100 से 120 गैस बुलेट टैंकरों की जरूरत

वर्तमान में निजी क्षेत्र के 58 बॉटलिंग एवं रिफिलिंग प्लांट के माध्यम से उपभोक्ताओं तक खाना पकाने वाली एलपीजी गैस पहुंचाई जाती है। नेपाली बाजार में घरेलू उपयोग के लिए 14.2 किलोग्राम क्षमता वाले डेढ़ करोड़ से अधिक गैस सिलेंडर इस्तेमाल हो रहे हैं।

इन गैस उद्योगों की जरूरत पूरी करने के लिए प्रतिदिन करीब 100 से 120 बुलेट टैंकरों में गैस लोड की जाती है। निगम के अनुसार, नया डिपो बनने के बाद नेपाली टैंकर सर्लाही से इसी दर पर गैस की ढुलाई कर सकेंगे।

मोतिहारी-सर्लाही एलपीजी गैस पाइपलाइन और 50 हजार टन क्षमता वाले भंडारण गृह का निर्माण नेपाल की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, उपभोक्ताओं को नियमित गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास