नेपाल को ग्रीन क्लाइमेट फंड से 1.29 अरब रुपये की मंजूरी

 


काठमांडू, 02 जुलाई (हि.स.)। जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों से लंबे समय से जूझ रहे नेपाल के लिए राहत भरी खबर आई है। ग्रीन क्लाइमेट फंड (जीसीएफ) बोर्ड की 45वीं बैठक ने नेपाल में जलवायु सहनशीलता (क्लाइमेट रेजिलिएंस) बढ़ाने के लिए 1.29 अरब रुपये के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

जीएसएफ बोर्ड ने नेपाल के कर्णाली प्रदेश में वन-आश्रित समुदायों की जलवायु सहनशीलता बढ़ाने, आजीविका के अवसर सृजित करने और स्थानीय क्षमता विकास पर केंद्रित प्रस्ताव को स्वीकृति दी।

इस सहायता को नेपाल की जलवायु वित्त यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। परियोजना को प्रारंभ में नेपाल की संस्था नेशनल ट्रस्ट फॉर नेचर कन्जर्वेशन (एन टी एन सी) ने तैयार किया था, जिसे जी एस एफ क प्रत्यक्ष पहुंच प्राप्त है।

चार वर्षीय इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कर्णाली प्रदेश में पारिस्थितिक तंत्र की मजबूती, जलवायु-अनुकूल आजीविका और संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना है। कर्णाली नेपाल के उन सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है, जहां कमजोर पर्वतीय पारिस्थितिकी, कठिन भौगोलिक स्थिति, उच्च गरीबी दर और भूस्खलन, बाढ़ तथा लंबे सूखे जैसी जलवायु आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

यह परियोजना नेपाल की राष्ट्रीय अनुकूलन योजना (2021–2050), नेशनल डिटरमाइंड कॉन्ट्रिब्यूशन्स तथा अन्य राष्ट्रीय जलवायु कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में सीधे योगदान देगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर जलवायु पहल को भी गति मिलेगी।

परियोजना के तहत पारिस्थितिक पुनर्स्थापना, प्रकृति-आधारित समाधान, जलवायु-अनुकूल आजीविका, सामुदायिक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और स्थानीय संस्थाओं की क्षमता निर्माण के माध्यम से 1 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

महिलाओं, आदिवासी समुदायों, दलितों और अन्य हाशिए पर मौजूद जलवायु-संवेदनशील समूहों की सार्थक भागीदारी और समान लाभ सुनिश्चित करना भी इस परियोजना की विशेष प्राथमिकता है।

परियोजना का लक्ष्य कर्णाली प्रदेश के 4 लाख से अधिक लोगों की जलवायु सहनशीलता बढ़ाना है। इसके कार्यान्वयन के लिए साझेदारी मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें राष्ट्रीय, प्रांतीय और स्थानीय संस्थाओं को शामिल किया जाएगा।

नेपाल का वित्त मंत्रालय जीएसएफ के संसाधनों का प्रबंधन करेगा, जबकि कर्णाली प्रदेश का उद्योग, पर्यटन, वन तथा वातावरण मंत्रालय प्रांतीय स्तर पर परियोजना के कार्यान्वयन का नेतृत्व करेगा और गतिविधियों का समन्वय करेगा।

कृषि, वन तथा वातावरण मंत्री और एनटीसी अध्यक्ष गीता चौधरी ने इसे नेपाल के जलवायु सहनशीलता अभियान की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा, “यह मंजूरी नेपाल की राष्ट्रीय जलवायु नीति को व्यावहारिक कार्य में बदलने और सबसे अधिक प्रभावित समुदायों तक पहुंचने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।”

वित्त मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग समन्वय प्रभाग के प्रमुख तथा जीएसएफ के नेशनल डिज़िग्नेटेड अथॉरिटी फोकल प्वाइंट धनिराम शर्मा ने एनटीएनसी बधाई देते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त तक पहुंच और उसके प्रबंधन में नेपाल की बढ़ती संस्थागत क्षमता को दर्शाता है।

एनटीएनसी के सदस्य-सचिव डॉ. चिरञ्जीवी पोखरेल ने कहा कि वे सरकारी निकायों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर प्रकृति-आधारित दीर्घकालिक जलवायु सहनशीलता निर्माण के लिए कार्य करने को लेकर उत्साहित हैं।

यह परियोजना जाजरकोट, जुम्ला, डोल्पा और दैलेख जिलों में सामुदायिक वन उपभोक्ता समूहों, महिला समूहों, आदिवासी समुदायों, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श और साक्ष्य-आधारित प्रक्रिया के बाद तैयार की गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास