नेपाली सेना ने काठमांडू में मनाया 'घोड़े जात्रा उत्सव', सैनिकों ने साहसिक करतब दिखाए

 


काठमांडू, 18 मार्च (हि.स.)। काठमांडू में मनाए जाने वाले सबसे प्राचीन पर्वों में से एक 'घोड़े जात्रा उत्सव' के तहत आर्मी परेड ग्राउंड टुंडिखेल में नेपाली सेना ने विशेष समारोह आयोजित किया। परंपरागत रूप से घोड़े जात्रा पर्व हर वर्ष चैत्र कृष्ण अमावस्या के अवसर पर धूमधाम से आयोजन किया जाता है।

प्राचीन मान्यता के अनुसार यह पर्व एक ऐसे राक्षस के वध की स्मृति में मनाया जाता है, जो कभी काठमांडू घाटी में बच्चों को नुकसान पहुंचाता था और स्थानीय लोगों को कष्ट देता था। मान्यता है कि उस राक्षस को घोड़ों के नाल से कुचलकर मार दिया गया था। तभी से घोड़े जात्रा की परंपरा जारी है, जो घाटी की सांस्कृतिक आस्थाओं और विरासत को दर्शाती है।

टुंडिखेल में आयोजित समारोह के दौरान नेपाली सेना ने घुड़सवारी के विभिन्न कौशल और प्रदर्शन प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल, उपराष्ट्रपति राम सहाय यादव, प्रधानमंत्री सुशीला कार्की सहित कई उच्च पदस्थ अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में सैन्य बैंड ने संगीत प्रस्तुत किया और घोड़ों ने विभिन्न बाधाओं को पार करते हुए शो-जंपिंग का प्रदर्शन किया। सैनिकों ने तेज गति से घुड़सवारी करते हुए बाधाओं को पार कर साहसिक करतब भी दिखाए।

कार्यक्रम का एक अन्य आकर्षण ‘क्रॉस-टेंट पेगिंग’ प्रदर्शन रहा, जिसमें सैनिकों ने घोड़े पर सवार होकर दुश्मन के तंबुओं को गिराने की तकनीक का प्रदर्शन किया। इसके अलावा घुड़दौड़ प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। प्रशिक्षित कुत्तों द्वारा किया गया प्रदर्शन भी कार्यक्रम का खास आकर्षण रहा। राष्ट्रपति पौडेल ने घोड़े जात्रा कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं में विजेता सैनिकों को पुरस्कार प्रदान किए।

कभी अपनी गति और शक्ति के कारण परिवहन और युद्ध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले घोड़े, आधुनिक वाहनों के बढ़ते उपयोग के साथ अपनी उपयोगिता खो चुके हैं। फिर भी घोड़े जात्रा पर्व आज भी उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास