नेपाल की विदेश नीति के केंद्र में आर्थिक कूटनीति : विदेश मंत्री शिशिर खनाल

 




काठमांडू, 07 अगस्त (हि.स.)। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि देश की विदेश नीति में आर्थिक कूटनीति केंद्रीय प्राथमिकता बन गई है। इसका उद्देश्य नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना और व्यापार, निवेश, रोजगार, उद्यमिता, पर्यटन, प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा सतत विकास के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करना है।

शुक्रवार को आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री खनाल ने कहा कि नेपाल चीन और दक्षिण एशिया के बीच आर्थिक, व्यापारिक तथा जनस्तरीय सहयोग के विस्तार में एक गतिशील सेतु की भूमिका निभा सकता है।

विदेश मंत्री खनाल ने कहा कि नेपाल अपने दोनों पड़ोसी देशों के साथ संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान, साझा हितों और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं के प्रति सम्मान के आधार पर संबंध बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि एशिया में तेजी से हो रहे आर्थिक बदलाव ने साझा समृद्धि के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा किए हैं। उनके अनुसार, सतत विकास और दीर्घकालीन आर्थिक प्रगति की दिशा में सहयोग ही सबसे विश्वसनीय रास्ता है।

खनाल ने कहा, “आर्थिक कूटनीति हमारी विदेश नीति की केंद्रीय प्राथमिकता बन गई है। नेपाल सतत, समावेशी और लचीले विकास के लिए सभी मित्र देशों के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है।” उन्होंने कहा कि चीन और भारत की आर्थिक प्रगति ने नेपाल सहित पड़ोसी देशों के लिए व्यापार विस्तार, निवेश आकर्षित करने, बुनियादी ढांचे के विकास, संपर्क विस्तार, पर्यटन संवर्धन और व्यापक आर्थिक सहयोग के नए अवसर पैदा किए हैं।

दक्षिण एशिया की आर्थिक क्षमता का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र अभी तक उस स्तर का आर्थिक एकीकरण हासिल नहीं कर पाया है, जिसकी इसमें क्षमता है। उन्होंने कहा कि संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने, व्यापार को सुगम बनाने, निवेश प्रवाह बढ़ाने और आपूर्ति शृंखलाओं के विकास से क्षेत्र में समृद्धि हासिल करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा, “हमारे सहयोग की सफलता का आकलन इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि हमने कितने समझौतों पर हस्ताक्षर किए, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि हमने अपने नागरिकों के लिए कितने अवसर पैदा किए।” खनाल ने बताया कि सरकार ने आर्थिक परिवर्तन को प्राथमिकता देते हुए गुणवत्तापूर्ण निवेश, बुनियादी ढांचा विकास, निर्यात संवर्धन, पर्यटन, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार और निजी क्षेत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है।

उन्होंने कहा कि नेपाल चीन और भारत के विकास को अपने आर्थिक विकास के लिए अवसर के रूप में देखता है। नेपाल का लक्ष्य एक स्थलरुद्ध (लैंडलॉक्ड) देश की स्थिति से आगे बढ़कर चीन और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाले गतिशील सेतु में बदलना है।

विदेश मंत्री ने नेपाल की सॉफ्ट पावर का भी उल्लेख किया। उन्होंने भगवान बुद्ध की जन्मभूमि नेपाल, गुरु पद्मसंभव की आध्यात्मिक विरासत, माउंट एवरेस्ट और यूनेस्को की कई विश्व धरोहर स्थलों को नेपाल की महत्वपूर्ण ताकत बताया। उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई, डिजिटल परिवर्तन, अनुसंधान, नवाचार और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और अकादमिक समुदायों के बीच सहयोग बढ़ाने का भी आह्वान किया।

बहुध्रुवीय विश्व में विश्वास, पारस्परिक सम्मान और साझा हितों के आधार पर साझेदारी विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए खनाल ने कहा कि नेपाल इस दिशा में रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास