नेपाल एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के ग्रे लिस्ट में

 




काठमांडू, 22 जून (हि.स.)। नेपाल एक बार फिर मनी लॉन्ड्रिंग की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने में असफल रहा है। नेपाल अभी भी मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण के जोखिम वाले देशों की सूची में शामिल बना रहेगा। फ्रांस के पेरिस में आयोजित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की प्लेनरी और वर्किंग ग्रुप बैठक में नेपाल को ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं किया है।

एफएटीएफ ने नेपाल को उन देशों की सूची में बरकरार रखा है, जिन पर वित्तीय अपराधों और संदिग्ध लेन-देन की निगरानी को लेकर विशेष ध्यान रखा जाता है। संस्था ने कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन, वित्तीय निगरानी प्रणाली को मजबूत करने और जोखिम वाले क्षेत्रों पर नियंत्रण जैसे सुधारों को और तेज करने की सलाह दी है।

गाैरतलब है कि, एफएटीएफ एक अंतरसरकारी संस्था है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण पर वैश्विक स्तर पर निगरानी रखती है। यह संस्था देशों को उनकी वित्तीय प्रणाली की कमजोरियों के आधार पर ग्रे और ब्लैक लिस्ट में शामिल करती है।

रिपोर्ट के अनुसार एफएटीएफ अपने आकलन में 40 तकनीकी और 11 प्रभावशीलता से जुड़े मानकों का उपयोग करता है।

नेपाल को 2008 में पहली बार इस सूची में शामिल किया गया था, जबकि 2014 में वह इससे बाहर निकलने में सफल रहा था। हालांकि इसके बाद से अब तक देश दोबारा ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं आ सका है। वर्ष 2012 में नेपाल लगभग ब्लैक लिस्ट में पहुंच गया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के हस्तक्षेप और नीतिगत सुधारों के चलते वह उस स्थिति से बच गया था। बाद में सुधारों के चलते 2014 में नेपाल ग्रे लिस्ट से बाहर आ गया था।

अब एक बार फिर असफलता के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल को वित्तीय प्रणाली में और सख्त सुधार लागू करने की जरूरत है।--------------------

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास