नेपाल-चीन सीमा पर पांच हिमतालों का होगा तकनीकी अध्ययन, प्राकृतिक आपदा के खतरे को कम करने पर बनी सहमति
काठमांडू, 21 सितंबर (हि.स.)। नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में स्थित संभावित खतरनाक हिमतालों से होने वाले जोखिम को कम करने के लिए चीन के भू-भाग में मौजूद पांच हिमतालों का तकनीकी अध्ययन कराने पर दोनों देशों के स्थानीय अधिकारियों के बीच सहमति बनी है।
चीन के ताक्लाकोट में हाल ही में हुई बैठक में हिमतालों से नेपाल की ओर उत्पन्न होने वाले संभावित खतरे, सीमा प्रबंधन, व्यापार और बुनियादी ढांचे समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। हुम्ला के प्रमुख जिला अधिकारी भोला नाथ गुरागाईं के अनुसार, दोनों पक्षों ने चीनी हिमालयी क्षेत्र में स्थित हिमतालों की स्थिति का तकनीकी टीम के माध्यम से अध्ययन कराने के लिए अपने-अपने संघीय सरकारों के समक्ष पहल करने पर सहमति जताई।
उन्होंने बताया कि संभावित हिमताल विस्फोट (जीएलओएफ) या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुम्ला के हिल्सा, किट सीमा क्षेत्रों में नुकसान हो सकता है। इसलिए हिमतालों की स्थिति, उनमें मौजूद पानी की मात्रा, संभावित खतरे और उससे होने वाले प्रभाव का तकनीकी अध्ययन जरूरी है।
रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से भारी नुकसान के बाद चीन की ओर से भी हिमतालों और प्राकृतिक आपदा के जोखिम को लेकर चिंता जताई गई और इसी सिलसिले में यह बैठक आयोजित की गई।
ताक्लाकोट के स्थानीय अधिकारियों की पहल पर हुई बैठक में नेपाल की ओर से चीनी भू-भाग में स्थित राक्षस ताल, मानसरोवर, गोंजुका, आबुका और सिरिमाल समेत विभिन्न झीलों के बारे में जानकारी साझा की गई।
प्रमुख जिला अधिकारी गुरागाईं के अनुसार, हिमतालों की स्थिति की नियमित जानकारी हासिल करने के लिए सैटेलाइट तकनीक के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा हिमपात और मौसम संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा खतरे की स्थिति में समय रहते एक-दूसरे को जानकारी देने के लिए प्रणाली विकसित करने की जरूरत पर भी सहमति बनी।
बैठक में नेपाल ने सीमा स्तंभों की स्थिति, सीमा पास, कृषि एवं पशु उत्पादों के निर्यात, व्यापार मेले, हिल्सा स्थित मितेरी पुल के संचालन और हिल्सा-सिमकोट सड़क निर्माण जैसे मुद्दे भी उठाए।
नेपाल की ओर से तीन सीमा स्तंभों की मरम्मत का मुद्दा भी चीन के समक्ष रखा गया। गुरागाईं के मुताबिक सीमा स्तंभ संख्या 6 के 2 नेपाल की ओर तथा 7 के 1 और 2 चीन की ओर स्थित हैं। इनमें से कुछ सीमा स्तंभों की मरम्मत की आवश्यकता बताई गई है।
सीमा क्षेत्र से आने वाले खाद्य पदार्थों और अन्य वस्तुओं की गुणवत्ता जांच के लिए क्वारंटीन व्यवस्था करने पर भी चर्चा हुई। प्रमुख जिला अधिकारी ने बताया कि सीमा पास की प्रक्रिया को और व्यवस्थित कर भविष्य में इसे डिजिटल प्रणाली में बदला जा सकता है। इस पर चीनी पक्ष ने भी सकारात्मक रुख व्यक्त किया।
दोनों पक्षों ने साल में एक बार लगने वाले सीमा हाट-बाजार को व्यवस्थित करने पर भी चर्चा की। नेपाल ने सीमावर्ती क्षेत्रों में करीब 30 किलोमीटर तक व्यापार और व्यवसाय को सुगम बनाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने का मुद्दा उठाया।
बैठक में हिल्सा-सिमकोट सड़क निर्माण का मुद्दा भी प्राथमिकता के साथ उठाया गया। बताया गया कि इस सड़क को चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत आगे बढ़ाने की संभावना पर भी चर्चा हुई।
बझांग के प्रमुख जिला अधिकारी मुकेश केसरी के अनुसार, बैठक में बझांग, दार्चुला और हुम्ला जिलों के सीमा क्षेत्र से जुड़े स्थानीय निकायों के प्रमुखों, प्रमुख जिला अधिकारियों तथा सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया।
चीनी पक्ष ने नेपाल की ओर से उठाए गए मुद्दों में स्थानीय स्तर पर हल किए जा सकने वाले मामलों को तत्काल लागू करने तथा केंद्र सरकार के निर्णय की आवश्यकता वाले विषयों को संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष भेजने का आश्वासन दिया।
बैठक में जरूरत पड़ने पर सीमा क्षेत्र में तैनात नेपाली सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय नागरिकों के लिए ताक्लाकोट में उपचार की व्यवस्था करने के विषय पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा अगले वर्ष ताक्लाकोट के स्थानीय अधिकारियों को हुम्ला भ्रमण के लिए आमंत्रित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मामलों पर जिला स्तर की बातचीत को नियमित और व्यवस्थित बनाने के लिए हुम्ला जिला प्रशासन कार्यालय और ताक्लाकोट के संबंधित अधिकारियों के बीच ईमेल के माध्यम से नियमित सूचना एवं विषयों का आदान-प्रदान करने पर भी सहमति बनी है। दोनों पक्षों ने इसके लिए संपर्क प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बैठक में उठाए गए सभी मुद्दों का दस्तावेजीकरण कर नेपाल सरकार के संबंधित निकायों को सौंपा जाएगा। स्थानीय स्तर पर समाधान होने वाले मामलों को दोनों देशों के स्थानीय अधिकारियों के समन्वय से आगे बढ़ाया जाएगा, जबकि नीतिगत विषयों के समाधान के लिए संघीय सरकार के माध्यम से पहल की जाएगी।
बैठक में शामिल अधिकारियों ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा के जोखिम को कम करने के साथ-साथ व्यापार, आवागमन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नेपाल और चीन के स्थानीय अधिकारियों के बीच नियमित समन्वय जरूरी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास