पूर्व चीफ जस्टिस चोलेन्द्र शमशेर राणा को हिरासत में लेने और रिहा करने पर नेपाल की संसद में सवाल
काठमांडू, 28 सितंबर (हि.स.)। नेपाल के पूर्व प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा को हिरासत में लेने और बाद में रिहा किए जाने के मामले को लेकर संसद में सवाल उठाए गए हैं। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य सचेतक युवराज दुलाल, एमाले के मुख्य सचेतक ऐनबहादुर महार और श्रम संस्कृति पार्टी के सांसद ध्रुवराज राई समेत अन्य सांसदों ने यह मुद्दा उठाया।
मुख्य सचेतक दुलाल ने कहा, “बिना गिरफ्तारी वारंट और बिना किसी कारण के सरकार ने एक बार फिर कानूनविहीन राज्य का उदाहरण पेश किया है। आधी रात में एक नया तमाशा दिखाया गया है।” उन्होंने सवाल किया कि देश कानून के शासन के तहत आगे बढ़ रहा है या कानूनविहीन स्थिति की ओर। यदि किसी से सुरक्षा को खतरा है तो क्या खतरा पैदा करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाना चाहिए या किसी और को?
यूएमएल के मुख्य सचेतक ऐनबहादुर महार ने कहा, “जिस तरह गुंडागर्दी और अपहरण की शैली में उन्हें गिरफ्तार किया गया, वह राज्य के आतंक का स्पष्ट उदाहरण है।” उन्होंने आपत्ति जताई कि राणा को इस तरह हिरासत में लिया गया और रिहा किया गया, मानो “मैं ही राज्य हूं।”
श्रम संस्कृति पार्टी के सांसद ध्रुवराज राई ने भरत दाहाल और चोलेन्द्र शमशेर राणा की गिरफ्तारी को लेकर सरकार से जवाब मांगा। सांसद राई ने इसी मामले को पूर्व प्रधानन्यायाधीश राणा को पुलिस द्वारा हिरासत में लेने और फिर रिहा करने की घटना से जोड़ते हुए सरकार से सवाल किया।श्रम संस्कृति पार्टी ने इन घटनाओं को लेकर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से स्वयं जवाब देने की मांग की है।
सांसद ध्रुवराज राई ने कहा, “एक तरफ भारत दाहाल को गिरफ्तार किया जाता है और फिर रिहा कर दिया जाता है। इसके बाद चोलेन्द्रशमशेर को उठाया जाता है और फिर छोड़ दिया जाता है। अगर मामला गंभीर है तो कम से कम उसे गंभीरता से लिया जाए। अगर गंभीर नहीं है, तो आखिर यह सरकार किस तरह काम कर रही है?”
पुलिस ने शनिवार रात राणा को उनके घर से हिरासत में लिया था। हालांकि, पुलिस ने अब तक स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया है कि उन्हें किस अपराध या किस आधार पर हिरासत में लिया गया था। रात में हिरासत में लिए गए राणा को दिन में रिहा कर दिया गया। सरकार की ओर से भी इस संबंध में आधिकारिक रूप से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
सरकार ने कुछ दिन पहले राजनीतिक विश्लेषक एवं लेखक भारत दाहाल को भी गिरफ्तार किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश कुमार रेग्मी की पीठ ने दाहाल की गिरफ्तारी के लिखित कारण पेश करने का आदेश दिया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास