नेपाल में निर्वाचन आयोग ने बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री हटाने के लिए प्रेस काउंसिल को लिखा पत्र

 


काठमांडू, 26 फ़रवरी (हि.स.)। नेपाल के निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को जेन जी आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग कर छात्रों की हत्या किए जाने संबंधित बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को हटाने की मांग करते हुए प्रेस काउंसिल नेपाल को पत्र भेजा है।

आयोग ने औपचारिक पत्र के माध्यम से प्रेस काउंसिल से अनुरोध किया है कि वह उक्त वीडियो सामग्री को हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाए। आयोग के अनुसार, यह वीडियो चुनावी प्रक्रिया और आचार संहिता के संदर्भ में “विवादित” प्रकृति का है, जिससे मतदाताओं में भ्रम फैलने या निर्वाचन की निष्पक्षता पर प्रश्न उठने की आशंका हो सकती है।

कार्यवाहक प्रमुख निर्वाचन आयुक्त राम प्रसाद भण्डारी ने जानकारी दी कि आयोग ने प्रेस काउंसिल नेपाल से हस्तक्षेप कर बीबीसी द्वारा प्रसारित वीडियो सामग्री के प्रसार को रोकने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि निर्वाचन अवधि के दौरान प्रकाशित या प्रसारित होने वाली सामग्री को कानून, आचार संहिता और निष्पक्ष पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप होना चाहिए।

आयोग का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देश में चुनावी माहौल संवेदनशील बना हुआ है और निर्वाचन आचार संहिता लागू है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की विवादास्पद या अप्रमाणित सामग्री मतदाताओं की धारणा को प्रभावित कर सकती है, इसलिए नियामक निकायों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

अब इस मामले में आगे की कार्रवाई प्रेस काउंसिल नेपाल द्वारा की जाने वाली समीक्षा और निर्णय पर निर्भर करेगी।

बीबीसी वर्ल्ड सर्विंग और बीबीसी नेपाली सर्विस ने गुरुवार की सुबह अंग्रेजी और नेपाली भाषा में दो वीडियो रिपोर्ट सार्वजनिक किए।

रिपोर्ट में 8-9 सितंबर 2025 को हुए जेन-जी आंदोलन की घटनाओं को प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन के दौरान गोली चलाने का आदेश तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र किशोर खाऊपुंग ने दिया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास