इटली में न्याय सुधार जनमत संग्रह में मेलोनी को झटका, एग्जिट पोल में ‘नो’ कैंप आगे

 

रोम, 23 मार्च (हि.स.)। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को उनके प्रमुख न्यायिक सुधार जनमत संग्रह में बड़ा झटका लग सकता है। सोमवार को आए एग्जिट पोल के अनुसार, विपक्ष समर्थित ‘नो’ कैंप मामूली बढ़त के साथ आगे दिखाई दे रहा है।

सर्वेक्षणों के मुताबिक ‘नो’ को लगभग 49% से 53% वोट मिलते दिख रहे हैं, जबकि सरकार के ‘यस’ अभियान को 47% से 51% समर्थन मिलने का अनुमान है। एक अन्य पोल में ‘नो’ को करीब 51.5% और ‘Yes’ को 48.5% वोट मिलने की संभावना जताई गई है।

इस जनमत संग्रह में करीब 60% मतदान हुआ, जो उम्मीद से ज्यादा है। चुनाव प्रचार के दौरान सरकार और न्यायपालिका के बीच तीखा टकराव देखने को मिला, जिससे देश में राजनीतिक और संस्थागत तनाव और बढ़ गया।

सरकार के प्रस्ताव में जजों और अभियोजकों के करियर को अलग करने और हाई काउंसिल ऑफ द जुडिशियरी को दो हिस्सों में बांटने की योजना शामिल थी। सरकार का तर्क था कि इससे न्यायपालिका की जवाबदेही बढ़ेगी और पक्षपात कम होगा।

हालांकि, विपक्षी दलों और न्यायिक संगठनों ने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर खतरा बताया। उनका कहना था कि इससे सरकार का प्रभाव बढ़ सकता है।

मेलोनी ने साफ कर दिया है कि जनमत संग्रह के नतीजे चाहे जो हों, वह इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने माटेओ रेंजी के 2016 के जनमत संग्रह के बाद हुए इस्तीफे से खुद को अलग बताया है।

यदि एग्जिट पोल सही साबित होते हैं, तो यह परिणाम विपक्ष के लिए बड़ी राहत हो सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी और फाइव स्टार मूवमेंट जैसे दल एकजुट होकर सरकार को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक हालात, खासकर डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों और ईरान संघर्ष के असर ने भी मतदाताओं की सोच को प्रभावित किया है।

अगर यह नतीजे अंतिम परिणामों में भी कायम रहते हैं, तो मेलोनी सरकार के लिए यह एक राजनीतिक झटका साबित हो सकता है और आने वाले चुनावों में इसकी गूंज देखने को मिल सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय