नाटो शिखर सम्मेलन में रक्षा खर्च बढ़ाने और यूक्रेन को समर्थन पर रहेगा फोकस : मार्क रूटे

 

अंकारा, 06 जुलाई (हि.स.)। नाटो महासचिव मार्क रूटे ने तुर्किये की राजधानी अंकारा में मंगलवार से शुरू होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन से पहले सोमवार को कहा कि इस बार सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के लिए रक्षा व्यय बढ़ाने की स्पष्ट, ठोस और विश्वसनीय योजना तैयार करना है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष हेग में तय किए गए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5 प्रतिशत रक्षा खर्च के लक्ष्य की दिशा में सदस्य देशों ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

रूटे ने पत्रकार वार्ता में बताया कि नाटो देशों के रक्षा निवेश में वर्ष-दर-वर्ष लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि वर्षों की कम निवेश की स्थिति के बाद अब गठबंधन वास्तविक सैन्य क्षमताओं का निर्माण कर रहा है। हालांकि उन्होंने आगाह किया कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक सैनिकों, अतिरिक्त संसाधनों और मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार की आवश्यकता होगी।

यूक्रेन को समर्थन जारी रहेगा

रूटे ने कहा कि नाटो सहयोगी देश रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर के नए रक्षा अनुबंधों की घोषणा करेंगे। उन्होंने कहा कि रूस लगातार यूक्रेन के शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है, इसलिए यूक्रेन को विशेष रूप से वायु रक्षा प्रणाली सहित आवश्यक सैन्य सहायता मिलती रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अपनी सेना की बहादुरी, समर्पण और रणनीतिक क्षमता के दम पर युद्धक्षेत्र की परिस्थितियां बदल रहा है, लेकिन उसे सहयोगी देशों के निरंतर समर्थन की जरूरत है।

कीव पर हमले से झलकती है 'पुतिन की हताशा'

रूस द्वारा कीव पर हालिया हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए रूटे ने कहा कि यह हमला दर्शाता है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हताश हैं। उनके अनुसार यूक्रेन ने रूसी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है, रूस के भीतर गहरे हमले किए हैं और रूसी सेना की प्रगति को काफी हद तक रोकने में सफलता पाई है। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना युद्ध जीतने का तरीका नहीं हो सकता।

ट्रंप की भूमिका की सराहना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नाटो के संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में रूटे ने ट्रंप की सराहना की। उन्होंने कहा कि ट्रंप के नेतृत्व के कारण यूरोपीय देश और कनाडा रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए मजबूर हुए। रूटे ने कहा कि ड्वाइट आइजनहावर के बाद ट्रंप पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जिन्होंने यूरोपीय सहयोगियों को अमेरिका के बराबर रक्षा व्यय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इसे पिछले कई दशकों से लंबित लक्ष्य बताया।

अमेरिकी सैन्य तैनाती की समीक्षा

अमेरिका द्वारा अपनी सैन्य तैनाती की समीक्षा के संबंध में रूटे ने कहा कि यह नाटो की योजना को और यथार्थवादी बनाएगा। उन्होंने बताया कि यदि इंडो-पैसिफिक और यूरो-अटलांटिक दोनों क्षेत्रों में एक साथ संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होती है तो अमेरिका कितना सैन्य सहयोग दे सकेगा, इसका अब अधिक स्पष्ट आकलन हो गया है। उन्होंने कहा कि यूरोप का अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर रहना टिकाऊ व्यवस्था नहीं है। भविष्य में दोनों पक्षों के बीच संतुलित सुरक्षा साझेदारी विकसित करना आवश्यक होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय