कराची में सात बलूच छात्र लापता, मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी एजेंसियों पर लगाए आरोप
क्वेटा, 06 अगस्त (हि.स.)। पाकिस्तान में बलूच छात्रों के कथित जबरन लापता किए जाने के आरोपों के बीच मानवाधिकार संगठनों ने सात छात्रों के गायब होने पर गंभीर चिंता जताई है। मानवाधिकार परिषद बलूचिस्तान (एचआरसीबी) ने आरोप लगाया कि कराची विश्वविद्यालय के पांच बलूच छात्रों को बुधवार को कराची के गुलशन-ए-इकबाल इलाके में उनके आवास पर छापेमारी के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों और रेंजर्स ने हिरासत में लिया, जिसके बाद से उनका कोई पता नहीं है।
एचआरसीबी के अनुसार, छात्रों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उनके निजी सामान भी साथ ले जाए गए। संगठन ने दावा किया कि लापता छात्रों की पहचान अजहर बलूच, घोष बख्श बलूच, शहजाद बलूच, अनीस बलूच और वसीम बलूच के रूप में हुई है।
संगठन का कहना है कि इससे पहले भी दो अन्य बलूच छात्र—एमफिल छात्र खलील बलूच और जुबैर बलूच—के कथित रूप से लापता होने की घटनाएं सामने आई थीं। एचआरसीबी ने पाकिस्तानी अधिकारियों से छात्रों का पता सार्वजनिक करने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और यदि उनके खिलाफ कोई मामला है तो उन्हें विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत सक्षम अदालत में पेश करने की मांग की है।
बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के मानवाधिकार विभाग पांक ने भी घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जबरन गुमशुदगी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है, जिससे व्यक्ति की स्वतंत्रता, सुरक्षा, न्यायिक प्रक्रिया और शिक्षा के अधिकार प्रभावित होते हैं।
वहीं, बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता सबीहा बलूच ने आरोप लगाया कि बलूच छात्रों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और यह अलग-थलग घटनाएं नहीं बल्कि एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं।
इसी बीच, बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने दावा किया कि बलूचिस्तान के खुजदार जिले के गोरू क्षेत्र में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित ड्रोन कार्रवाई में एक नाबालिग बच्चे की मौत हो गई। संगठन ने नागरिक आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसी कार्रवाइयों पर रोक लगाने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय