ईरानी अधिकारियों ने मोजतबा खामेनेई की गंभीर शारीरिक चोटों पर चिंता जताई
तेहरान (ईरान), 24 अप्रैल (हि.स.)। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की शारीरिक स्थिति पर गहरी नजर रखी जा रही है। कई रिपोर्टों में यह बताया गया है कि ईरान में संघर्ष के शुरुआती दौर में अमेरिकी हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। इस हमले में उनके पिता समेत कई कमांडर मारे जा चुके हैं। उनकी शारीरिक स्थिति पर बड़े खुलासे से इस बात को लेकर चिंता और बढ़ गई है कि तेहरान में असल में फैसले कौन ले रहा है और बंद दरवाजो के पीछे सत्ता का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।
ब्रिटेन के अखबार इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मोजतबा खामेनेई की सेहत पर ताजा जानकारी से भयानक चोटों की पुष्टि हुई है। खामेनेई को उस हमले में बहुत ज्यादा और चेहरा बिगाड़ने वाली चोटें आई थीं। इस हमले में उनके पूर्ववर्ती उनके पिता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। हमले के महीनों बाद भी इन चोटों का उनके रोजमर्रा के कामकाज पर गहरा असर पड़ रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि हमले में खामेनेई का चेहरा बुरी तरह झुलस गया था। डॉक्टरों का कहना है कि शायद उन्हें 'रिकंस्ट्रक्टिव प्लास्टिक सर्जरी' (चेहरे को ठीक करने वाली सर्जरी) की जरूरत पड़ेगी। इसी रिपोर्ट में यह भी जिक्र है कि उनकी चोटें सिर्फ चेहरे तक ही सीमित नहीं हैं। उनके एक पैर की कई बार सर्जरी हो चुकी है। इससे इस बात की संभावना बनी हुई है कि शायद उन्हें नकली पैर (प्रोस्थेटिक लिंब) लगवाना पड़े।
उनकी हालत से परिचित सूत्रों से मिली अतिरिक्त जानकारी के मुताबिक, वह अभी भी जलने तथा हड्डियों को हुई क्षति दोनों के ही लंबे समय तक बने रहने वाले प्रभावों से जूझ रहे हैं। इन शारीरिक मुश्किलों के बावजूद अधिकारियों का कहना है कि खामेनेई मानसिक रूप से पूरी तरह सचेत हैं और राजकाज के मामलों में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। हालांकि, उनकी चोटों की गंभीरता को देखते हुए ऐसा लगता है कि ईरान के शासन-प्रशासन के तरीके में काफी बदलाव करने पड़े हैं।
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्टों से यह संकेत मिलता है कि हालांकि खामेनेई होश में हैं और मामलों में शामिल भी हैं, लेकिन हमले में लगी गंभीर चोटों की वजह से सत्ता का सीधे तौर पर इस्तेमाल करने की उनकी क्षमता सीमित हो गई है। इस वजह से ईरान के शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के वरिष्ठ कमांडरों ने रोजमर्रा के फैसले लेने में ज्यादा से ज्यादा अहम भूमिका निभानी शुरू कर दी है। कहा जाता है कि ये जनरल अहम सैन्य और रणनीतिक अभियानों को संभाल रहे हैं और घायल सर्वोच्च नेता और सरकारी अधिकारियों के बीच प्रभावी रूप से मध्यस्थ के तौर पर काम कर रहे हैं।
खामेनेई का सार्वजनिक रूप से दूर रहना भी तमाम अटकलों को और हवा दे रहा है। सत्ता संभालने के बाद से उन्होंने न तो टीवी पर कोई संबोधन दिया है और न ही कोई सार्वजनिक भाषण। ऐसी ऊंची कुर्सी पर बैठे किसी व्यक्ति के लिए यह एक असामान्य बात है। रिपोर्टों से पता चलता है कि सुरक्षा जोखिमों को कम करने और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए संचार शायद बहुत ही नियंत्रित और अप्रत्यक्ष माध्यमों से हो रहा है। उनके स्वास्थ्य को लेकर बरती जा रही गोपनीयता ने भी आंतरिक समीकरणों को भी जटिल बना दिया है।
बताया जाता है कि वरिष्ठ अधिकारी उनसे सीधे मुलाकातें कम कर रहे हैं। इसकी एक वजह यह डर भी है कि कहीं उनकी मौजूदगी का पता न चल जाए और वे आगे होने वाले हमलों का निशाना न बन जाएं। इससे नेतृत्व का माहौल बिखरा-बिखरा सा हो गया है, और फैसले लेने का अधिकार सैन्य और राजनीतिक वर्ग के बीच बंट गया है।खामेनेई ने मार्च में अपने पिता की मृत्यु के बाद नेतृत्व संभाला था। वह असाधारण परिस्थितियों में इस पद पर आसीन हुए थे। नियुक्ति के समय वे पहले से ही घायल थे। उनके कार्यकाल में उनपर युद्धरत देश का नेतृत्व करने का भारी दबाव बना रहा।
ईरानी अधिकारियों ने अब तक उनके जुझारूपन और लगातार सक्रिय रहने पर जोर दिया है, लेकिन गंभीर चोटों, सार्वजनिक रूप से कम नजर आने और सैन्य हस्तियों पर बढ़ती निर्भरता ने ईरानी सरकार के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व की नाज़ुक स्थिति को उजागर कर दिया है। अमेरिका से तनाव के बीच ईरान में खामेनेई का स्वास्थ्य अहम पहलू बना हुआ है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद