ईरान युद्ध के दौरान गोपनीय जानकारी लीक मामले में 50 अमेरिकी अधिकारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट
वाशिंटन, 05 सितंबर (हि.स.)। ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिकी हथियारों के रणनीतिक स्टॉक में कमी से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक होने के मामले में अमेरिकी रक्षा विभाग ने जांच तेज कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगस्त में करीब 50 सैन्य और असैन्य अधिकारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया।
तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू
ने द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपाेर्ट के हवाले से बताया कि जांच के दायरे में जॉइंट स्टाफ के अधिकारी भी शामिल थे। जांचकर्ताओं का मुख्य फोकस ईरान के साथ सैन्य संघर्ष के चलते लंबी दूरी की मिसाइलों और पैट्रियट इंटरसेप्टर की उपलब्धता में कमी से संबंधित गोपनीय जानकारी के लीक होने पर था।
रिपोर्ट के मुताबिक पॉलीग्राफ टेस्ट की प्रक्रिया में एफबीआई शामिल नहीं थी। अमेरिकी सेना ने अपने आंतरिक जांचकर्ताओं के जरिए यह प्रक्रिया पूरी की। हालांकि, सभी वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं किया गया। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन को इस जांच से बाहर रखा गया।
जांचकर्ताओं ने यह भी पता लगाने की कोशिश की कि क्या किसी सरकारी अधिकारी ने विदेशी खुफिया एजेंसी के लिए काम करते हुए संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा की थी। इसकी वजह यह बताई गई कि संबंधित हथियारों के आंकड़ों तक पहुंच बेहद सीमित अधिकारियों के पास थी।
पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने जांच या आंतरिक कर्मचारियों से जुड़े मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि रक्षा विभाग गोपनीय जानकारी के अनधिकृत खुलासे को बेहद गंभीरता से लेता है और ऐसे मामलों की उचित जांच की जाती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी हथियारों के रणनीतिक भंडार में कमी की खबरों को खारिज किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना के पास हथियारों की भारी मात्रा मौजूद है। उन्होंने गोपनीय जानकारी के लीक को देशद्रोहपूर्ण बयान और फेक न्यूज बताया। ट्रंप ने चेतावनी दी कि लीक के लिए जिम्मेदार लोगों को खोजकर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पॉलीग्राफ जांच का संबंध कई अनधिकृत खुलासों से बताया जा रहा है। इनमें ‘सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस ऑर्डर्स बुक’ के एक हिस्से का लीक होना भी शामिल है।
लीक हुए दस्तावेज के अनुसार छह फोर-स्टार सैन्य अधिकारियों ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान को और बढ़ाने पर औपचारिक असहमति जताई थी। अधिकारियों ने कथित तौर पर चेतावनी दी थी कि युद्ध को लंबे समय तक जारी रखना अमेरिकी सैन्य तैयारियों और वैश्विक स्तर पर उसकी क्षमता को कमजोर कर सकता है।------------
हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी