ईरान ने पहली बार सार्वजनिक किया अमेरिकी-इजरायली विमानों का मलबा

 




तेहरान, 08 अगस्त (हि.स.)। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अमेरिकी और इजरायली विमानों के मलबे का एक बड़ा संग्रह सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया है। ईरानी मीडिया के अनुसार इस प्रदर्शनी में उन सैन्य विमानों और उपकरणों के अवशेष शामिल हैं, जिन्हें ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य संघर्ष के दौरान गिराए जाने या नष्ट किए जाने का दावा किया गया है।

ईरान के तसनीम न्यूज़ ने सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के हवाले से बताया कि जारी टीज़र में प्रदर्शनी की कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। इनमें एक अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमान के बताए जा रहे अवशेष भी नजर आते हैं। प्रदर्शित मलबे में पायलट की इजेक्शन सीट, विमान की कैनोपी का हिस्सा और पूंछ का एक हिस्सा शामिल बताया गया है।

ईरानी मीडिया के मुताबिक, एफ-15 के इन अवशेषों को पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में अन्य अमेरिकी और इजरायली विमानों के मलबे के अलावा ड्रोन और मिसाइलों के अवशेष भी रखे गए हैं।

आईआरजीसी के प्रवक्ता जनरल होसैन मोहेब्बी ने इससे पहले तस्नीम को दिए एक बयान में कहा था कि 12 दिन चले युद्ध के बाद आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स को स्वदेशी एयर डिफेंस क्षमता विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

उनके अनुसार, इस परियोजना को तेजी से पूरा किया गया और इसके परिणामस्वरूप एक नया घरेलू एयर डिफेंस सिस्टम विकसित हुआ। ईरानी अधिकारी का दावा है कि बाद में हुए संघर्ष के दौरान इस प्रणाली का इस्तेमाल किया गया।

मोहेब्बी ने दावा किया कि इस एयर डिफेंस सिस्टम ने संघर्ष के दौरान एक एफ-35 लड़ाकू विमान को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ आईआरजीसी की जवाबी मिसाइल और ड्रोन कार्रवाई में अमेरिकी सैन्य उपकरणों को भी नुकसान पहुंचा। दावा है कि इनमें विभिन्न रडार सिस्टम, एयर डिफेंस सिस्टम, अवाक्स विमान, हवाई ईंधन भरने वाले विमान, मानवयुक्त और मानवरहित लड़ाकू विमान तथा विमान शेल्टर शामिल थे। हालांकि इन दावों में बताए गए नुकसान और विमानों के गिराए जाने की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में उपलब्ध नहीं है। प्रदर्शनी को लेकर सामने आई जानकारी फिलहाल मुख्य रूप से ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी