भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त वक्तव्य में पश्चिम एशिया की स्थिति से चिंतित

 


मेलबर्न, 09 जुलाई (हि.स.)। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त वक्तव्य में ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती तथा स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है। दोनों देशों ने पश्चिम एशिया की स्थिति और उसके कारण ऊर्जा, संसाधनों तथा अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की आपूर्ति शृंखलाओं और कीमतों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया व्यापक सामरिक साझेदार (कम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनर) हैं और स्वतंत्र, मुक्त तथा समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध हैं। दोनों देशों ने खुले बाजार और नियम आधारित व्यापार व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसे आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा का आधार बताया गया है।

दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी और रणनीतिक निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। साथ ही आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए), व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) पर जारी वार्ता और अन्य द्विपक्षीय व्यवस्थाओं के माध्यम से ऊर्जा व्यापार और निवेश सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई।

संयुक्त वक्तव्य में ऑस्ट्रेलिया को भारत के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता तथा भारत को ऑस्ट्रेलिया के लिए तरल ईंधन और अन्य डाउनस्ट्रीम उत्पादों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बताया गया है। दोनों देशों ने ऊर्जा उत्पादों के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने और द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को और बढ़ाने का संकल्प लिया है।

दोनों देशों ने ऊर्जा मूल्य शृंखला में निवेश को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और भारत ने 2015 के भारत-ऑस्ट्रेलिया असैन्य परमाणु सहयोग समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा प्रावधानों के अंतर्गत केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम के भारत निर्यात को सक्षम बनाने संबंधी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की जानकारी दी।

संयुक्त वक्तव्य में ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं की मजबूती, क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने, ऊर्जा संक्रमण को गति देने, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और ऊर्जा व तरल ईंधन के लिए खुली व्यापार व्यवस्था बनाए रखने पर भी सहमति व्यक्त की गई। दोनों देशों ने माना कि ऊर्जा प्रणालियों में बढ़ता विद्युतीकरण भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने प्रशांत द्वीपीय देशों की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को भी स्वीकार किया और उनकी आर्थिक समृद्धि तथा लचीलेपन के लिए ऊर्जा आपूर्ति के महत्व पर बल दिया।

पीएमओ के अनुसार, दोनों देशों ने कोयला, डीजल, अन्य तरल ईंधन और प्राकृतिक गैस सहित ऊर्जा उत्पादों की स्थिर, सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही निम्न-कार्बन ईंधन और ऊर्जा संक्रमण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई। इस संदर्भ में ऑस्ट्रेलिया ने भारत की वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस) पहल का उल्लेख किया।

दोनों देशों ने क्षेत्रीय साझेदारों से भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं को खुला और निर्बाध बनाए रखने के प्रयासों में शामिल होने का आह्वान किया, ताकि क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर