मिस्र को अमेरिकी सैन्य मदद पर मानवाधिकार शर्त से छूट
काहिरा/वाशिंगटन, 01 अक्टूबर (हि.स.)। अमेरिका ने मिस्र को दी जाने वाली 320 मिलियन डॉलर की सैन्य सहायता पर लागू मानवाधिकार संबंधी शर्त को हटा दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह फैसला आतंकवाद निरोधक अभियानों, सीमा सुरक्षा और अप्रसार कार्यक्रमों के साथ अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए किया है।
अमेरिकी सांसदों को भेजे गए एक पत्र में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 की विदेशी सैन्य सहायता के तहत 320 मिलियन डॉलर के लिए आवश्यक प्रमाणन से मिस्र को छूट दी गई है। इसके साथ जारी ज्ञापन में ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के बाद मिस्र की ‘सहायक भूमिका’ को भी फैसले का एक आधार बताया गया है। हालांकि, दस्तावेज में मिस्र की इस भूमिका का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।
अमेरिका से मिस्र को 1979 में इजराइल के साथ शांति समझौते के बाद से लगातार सैन्य सहायता मिलती रही है। 1980 के दशक के अंत से मिस्र को हर साल करीब 1.3 अरब डॉलर की अमेरिकी सैन्य सहायता मिलती है। इसके एक हिस्से पर मानवाधिकार और लोकतंत्र से जुड़ी शर्तें लागू रहती हैं, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर माफ किया जा सकता है।
मानवाधिकार को लेकर विवाद
मिस्र के मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर अमेरिका और काहिरा के बीच पहले भी मतभेद रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में भी मानवाधिकारों के आधार पर सैन्य सहायता का कुछ हिस्सा रोका गया था। हालांकि, 2024 में गाजा युद्ध के बीच बाइडन प्रशासन ने मिस्र के लिए पूरी 1.3 अरब डॉलर की सैन्य सहायता जारी करने की अनुमति दी थी।
मानवाधिकार संगठनों ने राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी की सरकार पर व्यापक अधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। मिस्र सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और उसका कहना है कि देश की स्थिरता के साथ लोगों की बुनियादी जरूरतों और अधिकारों को सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय