अमेरिकी सैन्य डॉक्टर का कोर्ट में दावा- काेरोना टीके से हुई 28 सैनिकों की मौत
वॉशिंगटन, 05 सितंबर (हि.स.)। अमेरिका में कोविड-19 वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सेना की डॉक्टर थेरेसा लॉन्ग ने वर्जीनिया की एक फेडरल कोर्ट में दिए बयान में कहा है कि वह ऐसे मामलों की जांच कर रही हैं, जिनमें अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत को कोरोना के टीके से संभावित रूप से जोड़ा गया है।
रूस के टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे ने बीते 14 अगस्त को कोर्ट में दिए गए बयान का हवाला देते हुए बताया कि लॉन्ग 2,544 ऐसी मौतों की समीक्षा कर रही हैं, जिन्हें वैक्सीन एडवर्स इवेंट रिपोर्टिंग सिस्टम (वीएआरईएस) में दर्ज किया गया था। ये मामले फिलहाल अपुष्ट हैं और जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इनमें से कितनी मौतों का वास्तव में वैक्सीन से कोई संबंध था।
रिपोर्ट के मुताबिक लॉन्ग ने कोर्ट में यह भी कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से 28 ऐसे लोगों के बारे में जानती हैं, जिनकी मौत को वह कोरोना के टीके से जोड़ती हैं। हालांकि, उन्होंने इन मामलों के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं होने की बात कही।
लॉन्ग को स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर के वरिष्ठ सैन्य चिकित्सा सलाहकार के तौर पर काम करने के लिए नियुक्त किया गया है। उनके मुताबिक, उन्हें महामारी के दौरान सैन्य स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था और दो सैन्य मेडिकल डेटाबेस की समीक्षा का जिम्मा दिया गया है। उन्होंने इस जांच को करीब एक साल में पूरा करने की उम्मीद जताई है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। वीएआरईएस में किसी स्वास्थ्य समस्या या मौत की रिपोर्ट दर्ज होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह घटना टीके के कारण हुई। वीएआरईएस एक निगरानी प्रणाली है, जिसमें टीकाकरण के बाद सामने आने वाली घटनाओं की रिपोर्ट जमा की जाती है। कारण-सम्बंध स्थापित करने के लिए अलग से चिकित्सकीय और वैज्ञानिक जांच जरूरी होती है। इसलिए 2,544 का आंकड़ा “टीके से हुई 2,544 मौतें” नहीं माना जा सकता। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार ये ऐसी मौतों की रिपोर्ट हैं जिनकी वजह और टीके के बीच संभावित संबंध की जांच की जा रही है।
लॉन्ग की गवाही पूर्व सैन्य स्वास्थ्य अधिकारी टेरी एडिरिम से जुड़े एक मुकदमे के दौरान सामने आई। एडिरिम ने अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया, जबकि सीआईए का पक्ष है कि मामला रोजगार और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े विवाद का है। लॉन्ग ने इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से गवाही दी।
कोरोना महामारी के दौरान अमेरिकी सेना में टीकाकरण को लेकर अनिवार्य नीति लागू की गई थी। टीके से इनकार करने वाले हजारों सैन्यकर्मियों को सेवा से अलग किया गया। बाद में अमेरिकी सरकार ने इस नीति को समाप्त किया और टीका न लेने के कारण हटाए गए सैन्यकर्मियों की बहाली का रास्ता खोला।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी