यूएन महासभा में ब्राजील के राष्ट्रपति ने वेनेजुएला और क्यूबा का मुद्दा उठाया

 

न्यूयॉर्क, 22 सितंबर (हि.स.)। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान दुनिया को अलग-अलग प्रभाव क्षेत्रों में बांटने की कोशिशों पर सवाल उठाया और लैटिन अमेरिका में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध किया। उनका संबोधन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन से पहले हुआ।

राष्ट्रपति लूला ने यूएन में अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि यह संस्था अपने सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक, मानवता को युद्ध की विभीषिका से बचाने, में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पा रहा है।

लूला ने वेनेजुएला का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका द्वारा पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाए जाने और उनकी जगह अंतरिम नेतृत्व के आने के बाद क्षेत्र में अमेरिकी भूमिका को लेकर बहस जारी है।

क्यूबा के मुद्दे पर लूला ने अमेरिकी आर्थिक और ऊर्जा प्रतिबंधों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि लाखों क्यूबाई नागरिक इन प्रतिबंधों से प्रभावित हो रहे हैं और इसे सामूहिक दंड के रूप में देखा जा रहा है।

लूला ने व्यापक रूप से एकतरफा कार्रवाई और प्रभाव क्षेत्रों की राजनीति के बजाय बहुपक्षवाद तथा देशों की संप्रभुता के सम्मान की वकालत की। उनका संबोधन संयुक्त राष्ट्र महासभा की उस बहस के बीच हुआ, जिसमें इस वर्ष वैश्विक संघर्ष, बदलती भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रमुख मुद्दे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय