भूटान में ग्लेशियर झील फटने से बढ़ा बाढ़ का खतरा, कई नदी घाटियों में अलर्ट जारी

 




थिम्फू, 30 अक्टूबर (हि.स.)। भूटान में ग्लेशियर झील फटने (जीएलओएफ) की घटना के बाद बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भूटान के राष्ट्रीय जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान केंद्र (एनसीएचएम) ने 29 अक्टूबर को सार्वजनिक परामर्श जारी कर संवेदनशील नदी घाटियों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने और बाढ़ संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।

एनसीएचएम के अनुसार, ग्लेशियर झील फटने के बाद ताक्तसेमाखांग में सिंताफू छू और लुंगू छू (गंगचेन टैग छू) नदियों के संगम के पास एक कृत्रिम झील बन गई है। इस घटना के कारण नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।

संभावित खतरे को देखते हुए अधिकारियों ने मोछू और पुनात्सांगछू नदी घाटियों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। एनसीएचएम ने लोगों से नदी के किनारों से दूर रहने, बाढ़ संभावित इलाकों में जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया है। केंद्र ने चेतावनी दी है कि ग्लेशियर झील फटने के बाद नदी के प्रवाह में अचानक बदलाव आ सकता है, जिसका असर निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है।

एनसीएचएम ने बताया कि संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे घटनाक्रम पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। स्थिति का आकलन किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे स्थिति को लेकर नई जानकारी उपलब्ध होगी, आम लोगों को आगे के परामर्श और जरूरी अपडेट दिए जाएंगे।

गौरतलब है कि, ग्लेशियर झील फटने की घटनाएं पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ का कारण बन सकती हैं। ऐसे में भूटान के संवेदनशील नदी घाटियों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनी का पालन करने और पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी गई है। -------------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश