बांग्लादेश में रैपिड एक्शन बटालियन को खत्म करने की तैयारी

 




ढाका, 17 जून (हि.स.)। बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) को खत्म करने जा रही है। गृह मंत्रालय के मसौदे के अनुसार, आरएबी के स्थान पर नए बल का गठन किया जाएगा। महत्वपूर्ण यह है कि 2004 में गठित रैपिड एक्शन बटालियन देश का विशिष्ट अर्धसैनिक बल है। इसके पास मुख्य रूप से बांग्लादेश में आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने, उग्रवाद को कुचलने और संगठित आपराधिक गतिविधियों को रोकने का जिम्मा है।

ढाका ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया से संबंधित सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित ढांचे के तहत नया बल आरएबी के कर्मचारियों, संपत्तियों और चल रहे अभियानों की जिम्मेदारी संभालेगा। नए बल का नाम स्पेशल रिस्पॉन्स बटालियन (एसआरबी) या पीपल्स प्रोटेक्शन फोर्सेज (पीपीएफ) दोनों में से एक हो सकता है। गृह मंत्रालय के अनुसार, इसके लिए नया कानून लाकर आरएबी को खत्म कर इसका पूरा ढांचा नए बल में समाहित कर दिया जाएगा।

गृह मंत्रालय के मसौदे की प्रस्तावना में कहा गया है कि नए बल में समाहित किए जाने वाले आरएबी के कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवा शर्तें जस का तस रहेंगी। नए कानून का मकसद बांग्लादेश पुलिस के तहत एक खास सहायक फोर्स बनाकर अंदरूनी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत और आरएबी को खत्म करना है। नए बल के सदस्यों के पास किसी जगह में घुसने, तलाशी लेने, संदिग्धों को हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने का अधिकार होगा। लेकिन इसकी लिखित सूचना संबंधित थानों को देनी होगी।

आरएबी पर मानवाधिकार उल्लंघन के संगीन आरोप हैं। यूनाइटेड स्टेट्स ने 2021 में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के लिए बल के सात मौजूदा और पुराने अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया था। जुलाई में हुए बड़े विद्रोह के बाद जबरन गायब किए गए लोगों की जांच लिए गठित आयोग भी इस बल को खत्म करने की सिफारिश कर चुका है। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित सुधार का मकसद सिर्फ बल का नाम बदलना नहीं है, बल्कि एक ज्यादा जवाबदेह और अधिकारों के प्रति संवेदनशील स्पेशल यूनिट बनाना है।

ह्यूमन राइट्स एंड पीस फॉर बांग्लादेश के अध्यक्ष एडवोकेट मंजिल मुर्शिद ने कहा कि बल का नाम बदलने से अधिक जरूरी है जवाबदेही पक्का करना। उन्होंने कहा कि आरएबी में अनुभवी लोग हैं। बल में ऑपरेशनल क्षमता है। सुधारों का फोकस गलत काम करने वालों को सजा दिलाने के साथ-साथ निगरानी को मजबूत करने पर होना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद