बांग्लादेश में 54 लोगों की जान लेने और लाखों की जिंदगी तबाह करने के बाद कम हो रहा है बाढ़ का पानी

 


ढाका, 14 जुलाई (हि.स.)। बांग्लादेश में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा है लेकिन प्रभावित इलाकों में अब लोगों के सामने पुनर्वास और सामान्य जीवन बहाल करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं, राजधानी ढाका एक बार फिर भारी बारिश के बाद जलभराव से जूझ रही है, जिससे शहर की कमजोर जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रोथोम आलो सहित ढाका के प्रमुख अखबाराें ने आपदा प्रबंधन एवं राहत मंत्रालय के हवाले से बताया कि हबीगंज, चट्टोग्राम, कॉक्स बाज़ार, बांदरबन, खगराछड़ी, रंगमती और मौलवीबाज़ार समेत 59 उप जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़, पहाड़ी ढलानों से आए पानी और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक कम-से-कम 54 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 1.55 लाख परिवार और 6.09 लाख से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।

सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में 1,049 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां फिलहाल 38,422 लोग रह रहे हैं। बाढ़ पूर्वानुमान एवं चेतावनी केंद्र (एफएफडब्ल्यूसी) ने सिलहट, सुनामगंज, मयमनसिंह, नेत्रकोना, शेरपुर, लालमोनिरहाट, नीलफामारी, रंगपुर और कुरीग्राम सहित नौ जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के भीतर बाढ़ की आशंका जताई है।

हालांकि कई इलाकों में पानी उतरने लगा है लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। घरों में जमा कीचड़, ढही हुई दीवारें और बर्बाद घरेलू सामान लोगों के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। बाढ़ से फसलें, मछली पालन, पशुधन और खाद्यान्न का भारी नुकसान हुआ है, जिससे प्रभावित परिवारों के सामने आजीविका का संकट गहरा गया है।

सरकार ने राहत कार्यों के तहत 64 जिलों के लिए लगभग 8,950 टन चावल और 4.6 करोड़ टका की सहायता स्वीकृत की है। इनमें सबसे अधिक प्रभावित सात जिलों को 3,250 टन चावल और 1.75 करोड़ टका अतिरिक्त राहत के रूप में आवंटित किए गए हैं। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने प्रभावित लोगों के शीघ्र पुनर्वास और समन्वित राहत अभियान की आवश्यकता पर जोर दिया है।

इधर, लगातार हो रही बारिश के कारण राजधानी ढाका में भी व्यापक जलभराव की स्थिति बनी हुई है। शहर की सैकड़ों सड़कें पानी में डूब गई हैं, जिससे यातायात, व्यापार, स्कूलों और अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं।

शहरी योजनाकारों का कहना है कि ढाका में बार-बार आने वाली बाढ़ की मुख्य वजह प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था का कमजोर होना है। वर्षों से नहरों पर अतिक्रमण, आर्द्रभूमियों के सिकुड़ने, अनियोजित शहरीकरण और अपर्याप्त ड्रेनेज सिस्टम के कारण बारिश का पानी तेजी से नदियों तक नहीं पहुंच पाता।

विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के चलते कम समय में अत्यधिक बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि शहर का मौजूदा ड्रेनेज नेटवर्क इस दबाव को झेलने में सक्षम नहीं है। उनका मानना है कि केवल नालों की सफाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए नहरों और आर्द्रभूमियों का पुनर्जीवन, अतिरिक्त जल निकासी आउटलेट, रिटेंशन पॉन्ड और एकीकृत ड्रेनेज मास्टर प्लान लागू करना आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि प्राकृतिक जल निकासी तंत्र को पुनर्स्थापित नहीं किया गया तो हर मानसून में ढाका को इसी तरह जलभराव और शहरी बाढ़ का सामना करना पड़ेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी