बलूच कार्यकर्ता का आरोप- मानवाधिकार संगठन को कमजोर करने के लिए चल रहा संगठित अभियान
क्वेटा, 02 मई (हि.स.)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकार संगठनों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बलूच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) से जुड़ी कार्यकर्ता सम्मी दीन बलूच ने शनिवार को आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारी संगठन को कमजोर करने के लिए एक सुनियोजित अभियान चला रहे हैं।
सम्मी के अनुसार, यह संगठन क्षेत्र में कथित दमन के खिलाफ आवाज उठाता रहा है, लेकिन इसे दबाने के लिए विभिन्न तरीके अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि लोगों पर दबाव डालकर संगठन के खिलाफ बयान दिलवाए जा रहे हैं और कुछ मामलों में ब्लैकमेलिंग जैसी रणनीतियों का भी इस्तेमाल हो रहा है।
उन्होंने कहा कि निशाने पर वे लोग भी हैं जिनका संगठन से सीधा संबंध नहीं है, जिनमें लापता लोगों के परिवार और समर्थक शामिल हैं। उनका आरोप है कि इस तरह की कार्रवाइयों का मकसद संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाना और उसके प्रभाव को कम करना है।
सम्मी ने यह भी कहा कि बीवाईसी केवल एक छोटा समूह नहीं बल्कि एक व्यापक जन आंदोलन है, जो बलूच समुदाय की आवाज बनने का दावा करता है। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन के कई नेताओं को हिरासत में रखा गया है और वे कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
इस बीच, संगठन की एक अन्य नेता सबीहा बलूच ने भी क्षेत्र में बढ़ते मानवीय संकट पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे बनते जा रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों की पहचान और अस्तित्व पर असर पड़ सकता है।
सबीहा ने दावा किया कि कई महिलाओं के जबरन गायब होने के मामले सामने आए हैं और लोगों से अपील की कि वे इन घटनाओं को नजरअंदाज न करें। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर आवाज उठाने और हालात का विरोध करने का आह्वान किया।
हालांकि, इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और ऐसे आरोपों के चलते हालात और जटिल हो सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय