ऑस्ट्रेलिया ने इजराइली सेना पर यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच शुरू की
कैनबरा, 17 जून (हि.स.)। ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस (एएफपी) ने उन गंभीर आरोपों की जांच शुरू कर दी है जिनमें दावा किया गया है कि गाज़ा के लिए जा रहे राहत जहाज़ों के बेड़े (फ्लोटिला) पर कार्रवाई के दौरान इज़राइली सेना ने हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता के साथ यौन उत्पीड़न, यातना और दुर्व्यवहार किया।
रूस की सरकारी नियंत्रण वाली अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रुस टूडे (आरटी) के अनुसार, यह कदम तब उठाया गया जब 'ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला' से जुड़ी चार महिला कार्यकर्ताओं ने सोमवार को ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, मल्टीकल्चरल मामलों की मंत्री ऐनी एली और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। ये महिलाएं उन 11 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों में शामिल थीं जिन्हें मई में हिरासत में लिया गया था। उस समय इज़राइली सेना ने गाज़ा की नाकेबंदी तोड़कर मानवीय सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रहे फ्लोटिला को रोक दिया था।
कार्यकर्ता जूलियट लैमोंट ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों का अपहरण किया गया, उन्हें यातनाएं दी गईं, जेल में रखा गया और कुछ मामलों में यौन उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है।
एएफपी ने एक बयान में कहा कि मामले की जांच पीड़ित-केंद्रित और ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड अप्रोच के तहत की जा रही है, ताकि शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखा जा सके।
हालांकि, इज़राइल ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया स्थित इज़राइली दूतावास ने कहा कि दावों के समर्थन में कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है। दूतावास ने एक्टिविस्टों को पेशेवर उकसावे बाज बताते हुए कहा कि लगाए गए आरोप पहले ही झूठे साबित हो चुके हैं।
इस बीच, 'ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला' ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) में भी शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में इज़राइली सेना पर युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध, यातना और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।
बताया जा रहा है कि साइप्रस के निकट 18 मई को जब 'ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला' गाज़ा के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में पहुंचा तो इज़राइली सेना ने उसे रोक दिया। उन्होंने लगभग 40 देशों के 400 से ज़्यादा कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। यह मिशन इज़राइल की नौसैनिक नाकेबंदी को चुनौती देने और गाज़ा के मानवीय संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए तुर्की से रवाना हुआ था। हिरासत में लिए गए लोगों में इटली, यूके, कनाडा, तुर्की, ग्रीस, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया, आयरलैंड और न्यूज़ीलैंड के नागरिक शामिल थे।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने वीडियो जारी किए। इन वीडियो में हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता ज़िप-टाई से बंधे और घुटनों के बल ज़मीन पर माथा टिकाए हुए दिख रहे थे, जबकि मंत्री उनके बीच घूमते हुए उनका मज़ाक उड़ा रहे थे और उन्हें आतंकवाद का समर्थक बता रहे थे। कई देशों के पूर्व बंदियों ने मारपीट, यौन उत्पीड़न, अपमान और कानूनी मदद न मिलने का आरोप लगाया है।
ऑस्ट्रेलिया ने बेन-गवीर के व्यवहार की आलोचना करते हुए उन पर प्रतिबंध लगाए हैं। वहीं, फ्रांस और इटली ने भी कथित दुर्व्यवहार के मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि कनाडा ने स्वतंत्र जांच की मांग की है।
इज़राइल लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है और उसका कहना है कि फ्लोटिला मिशन राजनीतिक उद्देश्य से संचालित किए गए थे तथा उनका मकसद हमास को अप्रत्यक्ष समर्थन देना था।
माना जा रहा है कि, जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की सत्यता और संभावित कानूनी कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी