अमेरिका हथियारों का भंडार बढ़ाएगा, ट्रंप ने डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट लागू किया
वॉशिंगटन, 22 जून (हि.स.)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के हथियारों और सैन्य उपकरणों के भंडार को मजबूत करने के लिए डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट (डीपीए) लागू कर दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान के साथ लंबे संघर्ष और अन्य वैश्विक संकटों के कारण अमेरिकी हथियारों के भंडार में कमी आने की चिंताएँ बढ़ रही हैं।
11 जून को जारी एक मेमो में ट्रंप ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को रक्षा उत्पादन से जुड़ी बाधाओं को दूर करने और सैन्य उद्योग के साथ नए समझौते तैयार करने का निर्देश दिया। डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक वस्तुओं और हथियारों के उत्पादन को प्राथमिकता देने का अधिकार देता है।
इस बीच, चीन और पाकिस्तान ने मध्य पूर्व में शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार के बीच हुई टेलीफोन वार्ता में अमेरिका-ईरान समझौते और क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा हुई।
चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने युद्धविराम, शांति वार्ता की बहाली, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करने का समर्थन किया। चीन ने पाकिस्तान के साथ रणनीतिक समन्वय बढ़ाने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
उधर, ईरान ने दक्षिणी लेबनान में हालिया हमलों के बाद इज़राइल को सैन्य जवाब देने की चेतावनी दी है। ईरानी सैन्य कमान ने आरोप लगाया कि इज़राइल ने युद्धविराम समझौते का कई बार उल्लंघन किया है और यदि हमले नहीं रुके तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के साथ लगभग 15 सप्ताह तक चले संघर्ष और अन्य सैन्य अभियानों के कारण अमेरिका को अपने हथियारों और मिसाइलों के भंडार को फिर से भरने की आवश्यकता महसूस हुई है। इसी कारण ट्रंप प्रशासन घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सहयोगी देशों को सैन्य आपूर्ति सीमित करने की नीति पर भी विचार कर रहा है।
अमेरिकी कांग्रेस भी महत्वपूर्ण मिसाइल प्रणालियों और रक्षा उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता और दीर्घकालिक अनुबंधों को मंजूरी देने की दिशा में काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य में संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अमेरिका की सैन्य तैयारियों को मजबूत करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी