अमेरिका ने पश्चिम एशिया के कई देशों से अपने राजनयिकों, कर्मचारियों को वापस बुलाया
वाशिंगटन, 03 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनावों के बीच अमेरिका ने कतर, कुवैत, बहरीन, इराक, जॉर्डन से अपने गैर-आपातकालीन राजनयिकों, सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को वापस बुलाने का आदेश दिया है। सउदी अरब में ड्रोन हमले के बाद दूतावास बंद कर दिया गया और यरूशलम दूतावास ने नागरिकों को खुद सुरक्षित स्थान खोजने की सलाह दी है। साइप्रस समाचार एजेंसी (सीएनए) ने बताया कि अमेरिकी मिशन सऊदी अरब में मंगलवार को ड्रोन हमले के बाद बंद कर दिया गया। जेद्दा, रियाद और दहरान में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को अगले आदेश तक सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस ने यह कदम आंशिक रूप से इजराइल द्वारा ईरान पर हमले की योजनाओं को तेज करने की पृष्ठभूमि में उठाया है। इसके अलावा ईरान ने भी चेतावनी दी है कि यदि उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर उस पर हमला किया गया तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है। कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास भी अगले आदेश तक बंद रहेगा। सभी नियमित और आपातकालीन वीज़ा एवं कांसुलर सेवाएं फिलहाल रद्द कर दी गई हैं। इज़राइल में अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वह वहां से निकलने की इच्छा रखने वाले अमेरिकी नागरिकों को न तो निकासी सुविधा दे सकता है और न ही सीधे सहायता कर सकता है। दूतावास ने नागरिकों से अपनी सुरक्षा की व्यक्तिगत योजना बनाने की अपील की है। पश्चिम एशिया में तनाव के चलते क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और अमेरिका की यह कार्रवाई संभावित खतरे को देखते हुए एहतियाती कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य तैयारियों के बीच जारी इस तनातनी का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा पड़ सकता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक इलाका माना जाता है। तनाव बढ़ने के साथ ही वैश्विक बाजारों में घबराहट देखी गई और कच्चे तेल तथा सोने की कीमतों में तेजी आ गई।------------
हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी