मूवी रिव्यू: कॉलेज लाइफ और ज़ॉम्बी अफरा-तफरी का मज़ेदार मिश्रण है 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ज़ॉम्बीज'

 


लोकेश चंद्र दुबे

कलाकार: मोहन कपूर, अनुप्रिया गोयनका, जेस्सी लीवर

निर्देशक: गगनजीत सिंग, आलोक द्विवेदी

रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5)

कॉलेज कैंपस, ज़ॉम्बी आउटब्रेक और हल्की-फुल्की कॉमेडी को मिलाकर बनी 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ज़ॉम्बीज' एक मज़ेदार और मनोरंजक फिल्म साबित होती है। बॉलीवुड में हॉरर-कॉमेडी का ट्रेंड पहले भी देखा गया है, लेकिन कॉलेज लाइफ के बीच ज़ॉम्बी अफरा-तफरी का कॉन्सेप्ट इसे अलग पहचान देता है। फिल्म शुरुआत से अंत तक अपनी हल्की-फुल्की ऊर्जा बनाए रखती है और दर्शकों को एंटरटेन करने में सफल रहती है।

कहानी

फिल्म की कहानी एक कॉलेज कैंपस में शुरू होती है, जहां छात्रों की जिंदगी आम कॉलेज समस्याओं, हॉस्टल ड्रामा, दोस्ती, प्रतिस्पर्धा और पढ़ाई के दबाव के बीच गुजर रही होती है। सबकुछ सामान्य चल रहा होता है, तभी कैंपस में अचानक ज़ॉम्बी आउटब्रेक हो जाता है और माहौल पूरी तरह बदल जाता है।

इसके बाद शुरू होती है छात्रों की खुद को बचाने की जद्दोजहद, जिसमें डर, अफरा-तफरी और कॉमेडी तीनों का मज़ेदार मिश्रण देखने को मिलता है। फिल्म की सबसे अच्छी बात यह है कि यह खुद को बहुत गंभीर नहीं बनाती और लगातार मनोरंजन पर फोकस रखती है।

परफॉर्मेंस

मोहन कपूर अपने किरदार में संतुलित और सहज नजर आते हैं। वहीं अनुप्रिया गोयनका भावनात्मक दृश्यों में प्रभाव छोड़ती हैं और कहानी को ज़रूरी भावनात्मक आधार देती हैं। फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज जेस्सी लीवर साबित होते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेज़ेंस कई दृश्यों को और मज़ेदार बना देती है। युवा कलाकारों की ऊर्जा भी फिल्म के माहौल को जीवंत बनाए रखती है।

निर्देशन

निर्देशक गगनजीत सिंग और आलोक द्विवेदी ने फिल्म की रफ्तार को लगातार बनाए रखा है। कहानी कहीं ज्यादा धीमी नहीं पड़ती और विजुअल ट्रीटमेंट इसे रंगीन और आकर्षक बनाए रखता है। फिल्म के ज़ॉम्बी सीक्वेंस इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। अफरा-तफरी, हास्य और कैंपस एनर्जी को जिस तरह मिलाया गया है, वह कई जगह खूब मनोरंजन करता है। बैकग्राउंड स्कोर भी फिल्म के हल्के-फुल्के अंदाज़ को सपोर्ट करता है। हालांकि कहानी कई जगह प्रेडिक्टेबल लगती है और फिल्म शैली में कुछ नया जोड़ने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाती, लेकिन इसका मनोरंजक टोन दर्शकों को जोड़े रखता है।

फाइनल वर्डिक्ट

'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ज़ॉम्बीज' एक मज़ेदार हॉरर-कॉमेडी है, जो कॉलेज लाइफ और ज़ॉम्बी कैओस को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश करती है। फिल्म भले ही शैली को नया रूप न दे, लेकिन इसमें इतना हास्य, एक्शन और कैंपस मस्ती जरूर है कि दर्शक अंत तक जुड़े रहें।

अगर आप बिना ज्यादा लॉजिक लगाए सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए कोई हल्की-फुल्की हॉरर-कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन साबित हो सकती है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश चंद्र दुबे