फिल्म समीक्षा : हुमा कुरैशी के दमदार अभिनय से सजी है 'बेबी डू डाई डू'
कलाकार: हुमा कुरैशी, सिकंदर खेर, चंकी पांडे, सीमा पाहवा, विद्या मालवड़े, हिमांशु मलिक, रूपेश बाने, अरुण कुशवाह, मरुधर शेखावत, रचित सिंह
निर्देशक: नचिकेत सामंत
निर्माता: साकिब सलीम
शैली: एक्शन, क्राइम, सस्पेंस, थ्रिलर
रेटिंग: ⭐⭐⭐½ (3.5/5)
आजकल क्राइम-थ्रिलर फिल्मों की भरमार है, लेकिन 'बेबी डू डाई डू' अपने अनोखे विषय और मुख्य किरदार की वजह से अलग पहचान बनाती है। निर्देशक नचिकेत सामंत ने एक ऐसी महिला सुपारी किलर की कहानी दिखाई है, जो बोल और सुन नहीं सकती, लेकिन अपनी खामोशी को ही सबसे बड़ा हथियार बना लेती है। फिल्म में एक्शन, सस्पेंस, डार्क ह्यूमर और भावनाओं का अच्छा मिश्रण देखने को मिलता है, जो दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखता है।
कहानी
कहानी बेबी की है, जिसकी जिंदगी बचपन में हुई एक दर्दनाक घटना के बाद पूरी तरह बदल जाती है। अपनी जुड़वां बहन को खोने का दर्द उसे अपराध की दुनिया तक ले आता है। समय के साथ वह एक पेशेवर सुपारी किलर बन जाती है और हर मिशन को बेहद सटीक तरीके से अंजाम देती है। उसकी पहचान उसका छाता बन जाता है, जो उसके किरदार को और भी अलग बनाता है। बेबी सिर्फ पैसों के लिए हत्याएं नहीं करती, बल्कि उसके मन में अपनी बहन के असली हत्यारे तक पहुंचने की आग भी जल रही होती है। इसी तलाश के बीच कहानी कई दिलचस्प मोड़ लेती है और आखिर तक सस्पेंस बनाए रखती है।
अभिनय
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हुमा कुरैशी हैं। बिना ज्यादा संवाद बोले उन्होंने सिर्फ अपने हाव-भाव, आंखों और बॉडी लैंग्वेज के जरिए बेबी के किरदार को बेहद प्रभावशाली बनाया है। एक्शन दृश्यों से लेकर भावनात्मक पलों तक उनका अभिनय प्रभावित करता है।
सिकंदर खेर अपने किरदार में मजबूत नजर आते हैं और कहानी को अच्छी गति देते हैं। चंकी पांडे ने अपने अलग अंदाज से प्रभावित किया है, जबकि सीमा पाहवा, विद्या मालवड़े और हिमांशु मलिक भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं। सहायक कलाकारों का काम भी फिल्म को मजबूती देता है।
निर्देशन
निर्देशक नचिकेत सामंत ने एक अलग विषय को मनोरंजक अंदाज में पेश करने की कोशिश की है। फिल्म की रफ्तार अच्छी बनी रहती है और कहानी बेवजह नहीं भटकती। मुंबई के अंडरवर्ल्ड को सिनेमैटोग्राफी ने प्रभावशाली तरीके से दिखाया है। एक्शन दृश्य स्टाइलिश हैं और बैकग्राउंड म्यूजिक सस्पेंस को और मजबूत बनाता है। हालांकि दूसरे भाग में कुछ दृश्य थोड़े लंबे महसूस होते हैं, जिससे फिल्म की गति हल्की धीमी पड़ती है।
फाइनल वर्डिक्ट
'बेबी डू डाई डू' एक अलग सोच के साथ बनाई गई स्टाइलिश क्राइम-थ्रिलर है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत हुमा कुरैशी का शानदार अभिनय है। फिल्म की कहानी, सस्पेंस और एक्शन दर्शकों को बांधे रखते हैं, हालांकि स्क्रीनप्ले थोड़ा और कसा हुआ होता तो असर और बढ़ सकता था। अगर आपको ट्विस्ट, रहस्य और दमदार महिला किरदारों वाली क्राइम-थ्रिलर पसंद हैं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश चंद्र दुबे