समीक्षा : आज के रिश्तों का आईना है फिल्म 'ना जाने कौन आ गया'
आज के दौर में जब नई पीढ़ी के रिश्ते पहले से कहीं ज्यादा जटिल और भावनात्मक हो गए हैं। ऐसे में 6 मार्च 2026 को रिलीज़ होने वाली फिल्म ‘ना जाने कौन आ गया’ इन्हीं रिश्तों की अनकही परतों को सामने लाने की कोशिश करती है। विपुल धवन और पूजा अरोड़ा के प्रोडक्शन में बनी और विकास अरोड़ा की निर्देशित यह फिल्म एक संवेदनशील रिलेशनशिप ड्रामा है, जो प्यार, दूरी और कम्युनिकेशन गैप जैसे मुद्दों को बारीकी से छूती है।
कहानी
प्यार की शुरुआत अक्सर बेहद हल्की, खूबसूरत और बेफिक्र होती है, जहां छोटी-छोटी नोकझोंक, हंसी-मजाक और मासूमियत ही रिश्ते की पहचान होती है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, रिश्ते में जिम्मेदारियां, उम्मीदें और अहंकार अपनी जगह बनाने लगते हैं। फिल्म की कहानी कौशल (जतिन सरना) और टीना (मधुरिमा रॉय) के इर्द-गिर्द घूमती है। एक ऑफिस में साथ काम करते हुए दोनों के बीच प्यार पनपता है और जल्द ही शादी में बदल जाता है। शुरुआत में सब कुछ परफेक्ट लगता है, लेकिन धीरे-धीरे कौशल अपने करियर और पैसों की दौड़ में इतना व्यस्त हो जाता है कि टीना खुद को अकेला महसूस करने लगती है। बाहर से यह रिश्ता सामान्य दिखता है, लेकिन भीतर एक इमोशनल दूरी लगातार बढ़ती रहती है। इसी बीच टीना की जिंदगी में एक तीसरे व्यक्ति (प्रणय पचौरी) की एंट्री होती है, जो कहानी को नया मोड़ देती है। आगे क्या होता है, यही फिल्म का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।
परफॉर्मेंस
जतिन सरना ने कौशल के किरदार को बेहद सादगी और सच्चाई के साथ निभाया है। उनके अभिनय में एक ठहराव है, जो किरदार की जटिलता को उभारता है। खासतौर पर इमोशनल सीन्स में उनकी पकड़ मजबूत नजर आती है। मधुरिमा रॉय टीना के रोल में बेहद नेचुरल लगती हैं। उनकी सहजता और भावनात्मक अभिव्यक्ति किरदार को वास्तविक बनाती है। वहीं प्रणय पचौरी की एंट्री फिल्म में ताजगी और नया एंगल लेकर आती है, और वे अपने रोल में प्रभाव छोड़ते हैं।
निर्देशन और तकनीकी पहलू
निर्देशक विकास अरोड़ा ने फिल्म को ओवरड्रामा से दूर रखते हुए इसे रियल और रिलेटेबल बनाए रखने की कोशिश की है। हालांकि, कुछ हिस्सों में फिल्म की रफ्तार धीमी महसूस हो सकती है, लेकिन यह धीमापन कहानी की भावनात्मक गहराई को उभारने में मदद करता है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म की बड़ी ताकत है, उत्तराखंड की लोकेशंस को बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया है। संगीत भी कहानी के साथ अच्छी तरह जुड़ता है, और रेखा भारद्वाज की आवाज में टाइटल ट्रैक खास असर छोड़ता है।
फाइनल टेक
'ना जाने कौन आ गया' सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि एक आईना है, जो दिखाता है कि कैसे हम अपने ही रिश्तों में धीरे-धीरे दूर होते चले जाते हैं, बिना जाने। यह फिल्म याद दिलाती है कि रिश्ते सिर्फ साथ रहने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने, समय देने और भावनात्मक रूप से जुड़े रहने से मजबूत होते हैं। कुल मिलाकर, यह फिल्म मॉडर्न रिलेशनशिप्स की उस सच्चाई को सामने लाती है, जिससे आज की Gen-G ऑडियंस आसानी से खुद को जोड़ सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश चंद्र दुबे