देवभूमि फिल्म फेस्टिवल: पूर्वाग्रह से ग्रसित व्यक्ति की मानसिकता और भीतर के भय को उजागर करती फिल्म पिंडी दे गुरूचरन

 




मंडी, 04 जुलाई (हि.स.)। मंडी के संस्कृति सदन जारी तीन दिवसीय देव भूमि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल के दूसरे दिन मशहूर निर्माता निर्देशकों, लेखकों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर की फिल्मों ने दर्शें को भावविभाेर कर दिया। इसमें हिंदी फिल्मों के ख्याति प्राप्त लेखक एवं फिल्म निर्माता असगर वजाहत की कहानी सरदारजी पर आधारित फिल्म पिंडी दे गुरूचरन ने दर्शकों को बटवारे की मानसिकता से रू-बरू करवाया। हिंदुस्तान के मशहूर लेखक-निर्माता एवं जिने लाहौर नी वेख्या के लेखक असगर वजाहत ने बतौर क्रियेटिव हैड एवं प्रोडयूसर इस फिल्म की जिम्मेदारी निभाई है।

आजादी के बाद हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बटवारे पर आधारित इस फिल्म में पूर्वाग्रह से ग्रसित व्यक्ति की मानसिकता और आदमी के भीतर के भय से उत्पन्न परिस्थितयों को बखूबी उजागर किया है। फिल्म के निर्देशक संजय शांति गुप्ता ने बताया कि ख्वाजा अहमद अब्बास की कहानी सरदारजी को लेकर मीडिया में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। लेकिन उन्होंने अपनी ओर से इस कहानी को लेकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया उससे सारी धारणाएं निर्मूल साबित हुई। इसी कहानी पर असगर वजहत व उनके साथियों ने पिंड दे गुरूचरन फिल्म का तानाबाना बुना है।

इस फिल्म का नायक रेलवे में कलर्क है और वह अपनी ओर से पाकिस्तान जाने की सहमति दे चुका है। उसका एक दोस्त बहुत पहले ही पाकिस्तान रावलपिंडी में चला गया था। बटवारे के बाद एक सरदार जी पाकिस्तान से दिल्ली आते हैं, उन्हें उस मुसलमान कर्मचारी के साथ वाला क्वार्टर मिलता है। जिससे वह असहज हो जाता है। उसके मन में एकपूर्वाग्रह होता है कि सरदार कौम मुसलमानों की दुश्मन है। ये लोग उनसे नफरत करते हैं। इसके भय का एक और कारण भी होता है कि पाकिस्तान में सिखों का सामुहिक कत्लेआम किया गया और वहां से भगाने पर मजबूर कर दिया गया। कहानी में कई उतार -चढ़ाव हैं, सरदार जी की बेटी को पिंडी का वह दोस्त बचाता है, जिसके बारे में वह सरदारी से पूछता है। यह एक तरह से सरदार जी पर कर्ज होता है, जिसे वे पाकिस्तान जाने वाले रलवे कर्मचारी की जान बचाकर चुकाते हैं।

इस फिल्म के सह निर्माता सुरेंद्र कुमार जैन द्वारा ढाई आखर फिल्म का निर्माण किया जा चुका है। वे बताते हैं कि एक दिन असगर वजाहत के साथ बातें करते हुए ख्यवाजा अहमद अब्बास की कहानी सरदारजी को लेकर चर्चा हुई और हमने तय किया कि इस पर फिल्म बनाई जाए। इस तरह सरदारजी कहानी पर पिंडी दे गुरूचरन फिल्म बन गई। देवभूमि इंटरनेश्नल फिल्म फेस्टिवल इसका प्रिमियर शो किया गया। इसके अलावा उतरी भारत और अमेरिका के वांशिगटन डीसी में भी इस फिल्म का प्रिमियर रखा गया है। इसके अलावा रिंकू जायसवाल निर्देशित बंगाली ब्रिज टू इथोपिया, एक पागल औरत के गर्भवती होने की स्थितयों को उजागर करती है। वहीं पर विक्रांत सिद्धु के निर्देशन में विनय कुमार जिंदल द्वारा निर्मित फिल्म मर्सद ने भी बहुत प्रभावति किया। यह समुदाय विशेष के आतंक पर आधारित है। फिल्म में रूबी कंदौला, निशान भूल्लर, वकार शेख, आरपी सिंह, विक्टर जॉन आदि ने भूमिका निभाई है।

फिल्म फेस्टिवल के आयोजक चपवन शर्मा ने बताया कि इस फिल्म फेस्टिवल में वॉलीवुड नहीं हिंदुस्तानी और क्षेत्रीय सिनेमा पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। रविवार को फिल्म फेस्टिवल का समापन्न होने जा रहा है। इससे पूर्व करीब दो दर्जन फिल्माें का दर्शक आनंद ले सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा