21 सितंबर जन्मदिन विशेष: बुध और बृहस्पति का प्रभाव देता है दूरदर्शिता और वाक्पटुता, ज्ञान की रहेगी प्रबल इच्छा

 

21 सितंबर को जन्मे लोग दूरदर्शी, वाक्पटु, अनुशासनप्रिय और ज्ञान प्राप्त करने के इच्छुक माने जाते हैं। अंक ज्योतिष के अनुसार इस जन्मतिथि के जातकों पर बुध और बृहस्पति का संयुक्त प्रभाव रहता है। धर्म-अध्यात्म में आस्था, सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में रुचि और तेज गति से सोचने वाला मस्तिष्क इनकी प्रमुख विशेषताएं होती हैं।

समाचार विवरण:

21 सितंबर को जन्म लेने वाले व्यक्तियों की जन्मतिथि का स्वामी ग्रह बृहस्पति है और इनका जन्मांक धनु राशि के अंतर्गत आता है। सितंबर माह का अधिपति ग्रह बुध है। इसलिए इन जातकों के जीवन और व्यक्तित्व पर बुध एवं बृहस्पति ग्रह का सम्मिलित प्रभाव आजीवन बना रहता है।

ऐसे लोगों के विचारों में कई बार उग्रता देखने को मिलती है। ये कठोर अनुशासन पसंद करते हैं और इनका मस्तिष्क सदैव गतिशील रहता है। लंबे समय तक एक ही तरह का कार्य करना या किसी के अधीन रहकर काम करना इन्हें पसंद नहीं होता। स्वतंत्र रूप से कार्य करने की इच्छा इनके स्वभाव का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

परिस्थितियों और वातावरण को अपने मनोनुकूल बनाने की विशेष क्षमता इनमें होती है। धर्म और अध्यात्म के प्रति गहरी आस्था रहती है। सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रुचि लेते हैं। संगीत और साहसिक कार्यों की ओर इनका विशेष झुकाव रहता है।

भोग-विलास और मौज-मस्ती पर अपेक्षाकृत अधिक खर्च कर सकते हैं। जीवन में आर्थिक पक्ष को विशेष महत्व देते हैं। जरूरत के समय परिजनों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की स्थिति भी बन सकती है। ईर्ष्या और स्वार्थ की भावना कई बार इनके व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

क्रोध इनके लिए बड़ी कमजोरी साबित हो सकता है। ये बहुत जल्दी क्रोधित हो सकते हैं और आवेश की स्थिति में स्वयं का नुकसान कर बैठते हैं। इसके विपरीत इनका विनोदी स्वभाव लोगों को आकर्षित करता है। गृहस्थ जीवन सामान्यतः मधुर रहता है और स्वभाव में कोमलता एवं भावुकता भी देखने को मिलती है।

नई चीजें सीखने और लगातार ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा इनमें बनी रहती है। दूरदर्शिता और वाक्पटुता इनकी बड़ी ताकत होती है, जो जीवन में सफलता प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि क्रोध और उग्रता पर नियंत्रण रखें, तो अपनी बौद्धिक क्षमता का बेहतर उपयोग कर सकते हैं।

क्या करें उपाय:

  • नियमित रूप से अपने इष्ट देवी-देवता की पूजा एवं अर्चना करें।
  • दैनिक जीवन में सफेद एवं क्रीम रंग की वस्तुओं का प्रयोग करें।
  • बृहस्पति ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
  • क्रोध और आवेश में महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें।
  • ईर्ष्या एवं स्वार्थ की भावना पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें।
  • भाग्योदय के लिए योग्य विशेषज्ञ की सलाह से रत्न, उपरत्न अथवा यंत्र विधि-विधानपूर्वक धारण करें।

बृहस्पति यंत्र:

10 5 12
11 9 7
6 13 8

अनुकूल योग और जानकारी:

मंत्र: ॐ बृं बृहस्पतये नमः
व्रत: बृहस्पतिवार
अनुकूल दिन: रविवार, मंगलवार एवं गुरुवार
अनुकूल रंग: सफेद एवं क्रीम
अनुकूल मास: मार्च, जुलाई एवं अक्टूबर
अनुकूल तिथियां: 3, 12, 21, 30
अनुकूल वर्ष: 3, 12, 21, 30, 39, 48, 57, 66
अनुकूल अंक: 1, 7
जन्मरत्न: पुखराज
उपरत्न: गोल्डन टोपाज
महत्वपूर्ण समय: 19 फरवरी से 20 मार्च तथा 21 नवंबर से 20 दिसंबर

विशेष टिप्पणी:

21 सितंबर को जन्मे जातकों की दूरदर्शिता, वाक्पटुता, ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा, अनुशासन और परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने की क्षमता उनकी प्रमुख खूबियां होती हैं। यदि वे क्रोध, उग्रता और अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण रखते हुए अपनी बौद्धिक क्षमता को सही दिशा दें, तो सामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन में प्रभावशाली सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

विशेषज्ञ की राय:

यह संपूर्ण जानकारी हस्तरेखा विशेषज्ञ, रत्न-परामर्शदाता, फलित एवं अंक ज्योतिषी पंडित विमल जैन द्वारा दी गई है।

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