दिवाली कब है? 8 या 9 नवंबर… जानें गोवर्धन पूजा और भाई दूज की सही तारीख
हिंदू धर्म में दिवाली का त्योहार सबसे बड़े और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है. यह पर्व हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. दीपावली को दीपों का त्योहार भी कहा जाता है. इस दिन लोग अपने घरों को दीपों, रंगोली और रोशनी से सजाते हैं. मान्यता है कि दिवाली की रात माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है. साल 2026 में दिवाली का मुख्य पर्व 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा. इस दिन शाम के समय अमावस्या तिथि और प्रदोष काल का संयोग बन रहा है. इसी वजह से 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहेगा.
हिंदू धर्म में दिवाली का त्योहार सबसे बड़े और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है. यह पर्व हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. दीपावली को दीपों का त्योहार भी कहा जाता है. इस दिन लोग अपने घरों को दीपों, रंगोली और रोशनी से सजाते हैं. मान्यता है कि दिवाली की रात माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है. साल 2026 में दिवाली का मुख्य पर्व 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा. इस दिन शाम के समय अमावस्या तिथि और प्रदोष काल का संयोग बन रहा है. इसी वजह से 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहेगा.
दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि होती है. लोग शाम के समय अपने घरों और दुकानों में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं और दीप जलाकर मां लक्ष्मी का स्वागत करते हैं.
दिवाली की तारीख: 8 नवंबर 2026, रविवार
प्रदोष काल: शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक
वृषभ काल: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन करना शुभ माना जाता है. इस दौरान घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं. इसके साथ ही भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है.
धनतेरस से शुरू होगा पांच दिवसीय दीपोत्सव
दिवाली का त्योहार केवल एक दिन का नहीं होता, बल्कि इसकी शुरुआत धनतेरस से हो जाती है. पांच दिनों तक चलने वाले इस दीपोत्सव में हर दिन का अपना अलग धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. इस दौरान लोग पूजा-पाठ करते हैं, घरों को सजाते हैं और परिवार के साथ त्योहार की खुशियां मनाते हैं. इस तरह धनतेरस से लेकर भाई दूज तक पांच प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे.
गोवर्धन पूजा 2026 कब है?
दिवाली के अगले दिन कई जगहों पर गोवर्धन पूजा मनाई जाती है, लेकिन इस बार तिथि की गणना के कारण यह पर्व 10 नवंबर को मनाया जाएगा. पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है. द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी और 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी.
गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्रदेव के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था. उन्होंने सात दिनों तक पर्वत को धारण करके गोकुलवासियों और उनके पशुओं की रक्षा की थी. मान्यता है कि तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई.
भाई दूज 2026 कब मनाई जाएगी?
दिवाली के बाद भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है. इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. साल 2026 में भाई दूज का त्योहार 11 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज का संबंध भगवान यमराज और उनकी बहन यमुना से है. कहा जाता है कि एक बार यमराज अपनी बहन यमुना के घर उनसे मिलने पहुंचे थे. यमुना ने उनका स्वागत किया और उनके माथे पर तिलक लगाकर भोजन कराया. इससे प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे सुख-समृद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलेगा. इसी मान्यता के चलते भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं और उनके मंगलमय जीवन की कामना करती हैं.